इस ट्रेन में 20-25 कोच हैं, जिनमें से प्रत्येक का वजन सामान्य कोचों से अधिक है, क्योंकि वे बुलेटप्रूफ और बमरोधी सामग्री से बने हैं. ट्रेन की स्पीड 50-60 किमी/घंटा तक है, क्योंकि बख्तरबंद कोच और अतिरिक्त सुरक्षा उपकरणों के कारण इसका वजन बहुत अधिक है.
प्योंगयांग से व्लादिवोस्तोक (680 किमी) की यात्रा में यह ट्रेन लगभग 20-24 घंटे लेती है. ट्रेन में किम के लिए शानदार शयनकक्ष, बाथरूम, कॉन्फ्रेंस रूम और एक निजी कार्यालय है. एक विशेष कोच में रेस्तरां है. जहां ताजा लॉबस्टर, फ्रांसीसी शराब, और रूसी, चीनी, कोरियाई, जापानी व्यंजन परोसे जाते हैं. सैटेलाइट फोन, इंटरनेट, और आधुनिक संचार प्रणाली इसे एक चलते-फिरते कमांड सेंटर बनाती है, जिससे किम यात्रा के दौरान भी देश का संचालन कर सकते हैं.
इस ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य है. इसके डिब्बों में हवाई हमले से बचाने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली और छोटे हथियारों की व्यवस्था है. यात्रा से पहले 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी रेल मार्ग, स्टेशनों, और आसपास के क्षेत्रों की गहन जांच करते हैं. एक हेलीकॉप्टर ट्रेन के आगे उड़कर किसी भी खतरे की आशंका को टटोलता है.
रूस और उत्तर कोरिया के रेल ट्रैक की चौड़ाई में अंतर के कारण, सीमा पर ट्रेन के पहियों को बदलने में कई घंटे लगते हैं. इस दौरान सुरक्षा और सख्त हो जाती है.
किम जोंग उन के दादा किम इल-सुंग और पिता किम जोंग-इल भी ऐसी बख्तरबंद ट्रेनों का इस्तेमाल करते थे, क्योंकि वे हवाई यात्रा से डरते थे. किम जोंग-इल के पास 6 ऐसी ट्रेनें थीं, जिनमें से एक किम जोंग उनसे विरासत में ली. किम की ट्रेन अपने अनूठे डिज़ाइन और सुरक्षा के कारण अलग है. यह ट्रेन न केवल किम की यात्रा को सुरक्षित बनाती है, बल्कि उत्तर कोरिया की ताकत को भी दुनिया के सामने पेश करती है.





