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India Bhutan Relation: भूटान की वादियों में भारत ने ऊर्जा का नया इतिहास रच दिया है. 1020 मेगावाट की पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना पूरी हो गई है. इस प्रोजेक्ट के पूरे होने के साथ ही न सिर्फ भूटान की बिजली क्षमता 40% बढ़ गई, बल्कि हजारों घर रोशनी से जगमगा उठे. भारत-भूटान की ये दोस्ती अब ग्रीन एनर्जी की मिसाल बन चुकी है. देखिए शानदार तस्वीरें…(सभी फोटो News18)

भारत के सहयोग से बनी पुनात्सांगचू-II (1020 मेगावाट) जलविद्युत परियोजना आखिरकार पूरी हो गई. इसकी अंतिम यूनिट-6 (170 MW) सफलतापूर्वक ग्रिड से जुड़ चुकी है. इस उपलब्धि के बाद भूटान की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 40% की छलांग लगी है.

भूटान की कुल स्थापित क्षमता अब 3500 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है. पहाड़ी देश के लिए यह उपलब्धि सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके आर्थिक विकास, औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा निर्यात की दिशा में बड़ा कदम है. भारत-भूटान का यह सहयोग दोनों देशों के रिश्ते की गहराई दिखाता है.

18 अगस्त को भूटान में आयोजित समारोह में परियोजना का औपचारिक समापन हुआ. इस मौके पर भूटान के प्रधानमंत्री और भारत के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद थे. यह पल सिर्फ ऊर्जा परियोजना का नहीं बल्कि भारत-भूटान दोस्ती की एक और मिसाल का था, जिसने दशकों से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत किया.

भारत और भूटान ने अब तक मिलकर 5 बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं पूरी की हैं. ये परियोजनाएं हैं चुखा, कुरिच्छु, ताला, मंगदेच्छु और अब पुनात्सांगचू-II. इन परियोजनाओं ने भूटान को एक ग्रीन एनर्जी हब में बदल दिया है. जबकि भारत के लिए यह स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा का स्रोत साबित हो रही हैं.

पुनात्सांगचू-II सिर्फ एक ऊर्जा प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत और भूटान के बीच ‘विन-विन पार्टनरशिप’ का प्रतीक है. भारत ने न सिर्फ तकनीकी और वित्तीय सहयोग दिया बल्कि पूरे प्रोजेक्ट को समय पर और सुरक्षित तरीके से पूरा करने में अहम भूमिका निभाई.

यह उपलब्धि दोनों देशों के बीच भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी संयुक्त दृष्टि दस्तावेज (2024) के अनुरूप है. इस दस्तावेज में स्वच्छ ऊर्जा, नई हाइड्रो परियोजनाओं और क्रॉस-बॉर्डर पावर ट्रेड पर जोर दिया गया था. आने वाले सालों में दोनों देश मिलकर और भी सस्टेनेबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ाएंगे.

गौरतलब है कि भूटान आज अपनी ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी करने के साथ-साथ भारत को बिजली निर्यात कर रहा है. यह रिश्ता सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि पड़ोसी भाईचारे और आपसी विश्वास पर टिका है. पुनात्सांगचू-II का समापन भारत-भूटान की उस साझेदारी की तस्वीर है, जो आने वाले दशकों तक दक्षिण एशिया में ऊर्जा सहयोग की मिसाल बनेगी.





