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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुकदमे का लंबे समय तक चलना भी मानसिक सजा है. 75 साल की महिला को 22 साल पुराने रिश्वत मामले में जेल की सजा घटाकर 31 दिन मान ली गई.
सुप्रीम कोर्ट ने 22 साल बाद मामले में फैसला सुनाया.उनके खिलाफ 2002 में आरोप लगा था कि उन्होंने 300 रुपये की रिश्वत मांगी थी. ट्रायल कोर्ट ने उन्हें एक साल की सजा सुनाई थी. 2010 में मद्रास हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की.
अब लगभग 22 साल बाद यह केस सुप्रीम कोर्ट में निपटा. अदालत ने उनकी सजा कम कर दी और कहा कि जो जेल की सजा उन्होंने अब तक काटी है (करीब 31 दिन), वही काफी है. हालांकि, कोर्ट ने उन पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगा दिया.
फैसला सुनता हुए जजों ने क्या कहा?
जस्टिस एन. वी. अंजारिया और जस्टिस ए. एस. चंद्रुकर की बेंच ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सजा के खिलाफ अपील करता है और हर दिन उस फैसले का इंतजार करता है, तो वह लगातार मानसिक तनाव से गुजरता है. ऐसे में मुकदमे का लंबा खिंचना ही एक तरह की पीड़ा है.
आरोपी ने कोर्ट में क्या दी थी अर्जी?
महिला के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से सजा कम करने की गुजारिश की थी. अदालत ने कहा कि चूंकि महिला अब 75 साल की हैं और विधवा भी हैं, इसलिए जेल की सज़ा घटा दी जाती है. लेकिन अगर वे तय समय तक जुर्माना नहीं भरती हैं, तो उन्हें फिर से जेल जाना होगा.
New Delhi,Delhi
August 27, 2025, 19:26 IST





