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गैराज में जन्मा एक्टर, कहलाया मनहूस, कार-घर-ऑफिस सब रखा गिरवी, डायरेक्टर बनते ही चमकी किस्मत

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नई दिल्ली. लिखी हुई किस्मत को कैसे बदलता जा सकता है. बॉलीवुड का ये हीरो सबसे बड़ा उदाहरण है. गैराज में जन्मा यह लड़का कभी बॉलीवुड में ‘मनहूस’ कहलाया. फिल्मों में लीड होरो बनने के लिए इंडस्ट्री में कदम रखा, लेकिन साइड हीरो या करेक्टर रोल्स में ही एक्टिंग रोल समिट गया. काम पाने के लिए दोस्तों से उधार लेना पड़ा और हालात ऐसे बने कि घर, कार और यहां तक कि ऑफिस भी गिरवी रखना पड़ा. लेकिन किस्मत ने तब करवट ली जब उसने कैमरे के सामने से हटकर कैमरे के पीछे खड़ा होना चुना. ये कहानी उस एक्टर से बने डायरेक्टर की है, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के बाद एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी और खुद को बॉलीवुड के सबसे सफल डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की लिस्ट में शुमार कर लिया.

इस एक्टर ने 1970 से 1980 के दशक में करीब 94 फिल्मों में एक्टिंग की. लेकिन जिन फिल्मों में उन्होंने काम किया, वो चंद ही फिल्में थीं, जिन्हें लोगों ने खूब प्यार दिया. माता- पिता दोनों संगीतकार रहे, लेकिन बेटे पर एक्टिंग का भूत सवार हुए और किस्मत को आजमाने के लिए वो पर्दे के सामने पहुंच गया. यह कहानी है फिल्ममेकर राकेश रोशन की, जिन्होंने अपने संघर्षों से सीख लेकर खुद को बॉलीवुड के सबसे सफल डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के रूप में स्थापित किया.

मां-पापा दोनों थे संगीतकार

पिता रोशन नागरथ और मां इरा रोशन दोनों का संगीत से रिश्ता था. जब राकेश रोशन का जन्म हुआ तो उनके माता-पिता दोनों मुंबई में संघर्ष कर रहे थे. मिड-डे के साथ एक इंटरव्यू में राकेश ने खुद बताया था, ‘मेरा जन्म बॉम्बे के एक गैराज में हुआ था. यह गैराज बड़े संगीतकार हुस्नलाल भगतराम का था, जहां मेरे पिता रहते थे. जब पापा को काम मिलना शुरू हुआ, तब हम संताक्रूज शिफ्ट हुए.

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राकेश रोशन ने फिल्म ‘घर घर की कहानी’ से एक्टिंग की शुरुआत की.

17 साल के राकेश पर जब आईं घर की जिम्मेदारियां

एक्टिंग के दौरान मिलने वाली मुश्किलों को देखते हुए उन्होंने अपना सरनेम नागरथ से बदलकर रोशन कर लिया, ताकि प्रोड्यूसर्स को पता चल सके कि वह रोशन नागरथ के बेटे हैं. राकेश जब सिर्फ 17 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर का काम शुरू किया, लेकिन एक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा.

94 फिल्मों में किया काम, मगर सफलता नहीं मिली

राकेश रोशन ने 1970 में ‘घर घर की कहानी’ से एक्टिंग की शुरुआत की. 1971 में ‘सीमा’ में उन्हें पहली बार लीड रोल मिला, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई. इसके बाद ‘आंखों आंखों में’, ‘आंख मिचौली’ जैसी फिल्मों में लीड रोल के बावजूद वह बतौर हीरो कामयाब नहीं हो पाए. उन्होंने खुद स्वीकार किया कि 94 फिल्मों में से 70 में उन्हें काम इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने खुद मांगा था. निराशा में उन्होंने विलेन के रोल भी किए.

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नीतू कपूर ने एक बार उनके साथ काम करने से मना कर दिया था.

दोस्तों से उधार लेकर चलाया घर

संघर्ष के दिनों में राकेश को अपने परिवार पत्नी पिंकी रोशन, बेटी सुनैना और बेटे ऋतिक रोशन को पालना मुश्किल हो गया. वे अपने भाई और माता-पिता के साथ एक दो-बेडरूम फ्लैट में रहते थे. ऋतिक ने सिमी ग्रेवाल के शो रेंडेजवस में बताया था- ‘हम गद्दों पर सोते थे. धीरे-धीरे फर्नीचर आया. पापा के लिए वो वक्त बहुत मुश्किल था. राकेश रोशन ने द रोशन्स डॉक्यूमेंट्री में यह भी स्वीकार किया कि उस दौर में वे अक्सर दोस्तों से 5000 रुपये तक उधार लेते थे ताकि बिजली-पानी के बिल भर सकें.

कहलाए मनहूस, हीरोइन ने किया साथ काम करने से मना

1977 में फिल्म ‘प्रियतमा’ से उन्हें बड़ा मौका मिलने वाला था, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स और हीरोइन नीतू कपूर ने उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया. उन्हें ‘मनहूस’ कहकर रिजेक्ट कर दिया गया. इस घटना ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया. उन्होंने कहा था, ‘मैं छत पर गया और भगवान से चीख-चीखकर पूछा- क्यों कर रहे हो मेरे साथ ऐसा?’ इतना ही नहीं, वे जब अपने दोस्त ऋषि कपूर और जितेंद्र के साथ पार्टियों में जाते थे तो ग्रुप फोटो से उन्हें और उनकी पत्नी पिंकी को हटाया जाता था.’रेंडेजवस विद सिमी गरेवाल’ शो पर उन्होंने ये किस्सा शेयर किया था और बताया कि उन्हें खुद के लिए इन सब चीजों से पिंकी के लिए बुरा लगता था.

डायरेक्टर बनने का लिया रिस्क

1987 में राकेश रोशन ने एक्टिंग छोड़कर डायरेक्शन में हाथ आजमाया. अपनी पहली फिल्म ‘खुदगर्ज’ बनाने के लिए उन्होंने अपना घर और कार तक गिरवी रख दी.फिल्म सुपरहिट रही और इसके बाद ‘खून भरी मांग’, ‘किशन कन्हैया’ जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के टॉप डायरेक्टर्स में शामिल कर दिया. साल 2000 में उन्होंने अपने बेटे ऋतिक को ‘कहो ना प्यार है’ से लॉन्च किया, जो ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. इसके बाद ‘कोई मिल गया’ और ‘कृष’ सीरीज ने इस फादर-सन डुओ को बॉलीवुड का सबसे सफल डुओ बना दिया.

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