इस साल मई से जुलाई के बीच आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है. इस साल मई में जहां 31,659 भारतीय पर्यटक तुर्की पहुंचे थे, वहीं जुलाई में यह संख्या घटकर सिर्फ 16,244 रह गई. यानी महज तीन महीनों में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई.
44% घट गए पर्यटक
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल पर्यटन रुझान में बदलाव की वजह से नहीं, बल्कि भारत के लोगों की तुर्की को लेकर बदली धारणा का परिणाम है. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की घड़ी में तुर्की का पाकिस्तान के साथ खड़ा होना, भारतीय जनता के गले नहीं उतर रहा. यही कारण है कि भारतीय सैलानी अब दूसरी जगहों की तलाश में जुट गए हैं.
‘तुर्की के लिए सबक’
पर्यटन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारतीय पर्यटक हर साल तुर्की के लिए एक बड़ा बाजार साबित होते आए हैं. तुर्की के लिए भारत से जाने वाले पर्यटक न केवल संख्या में बड़े होते हैं, बल्कि खर्च करने के मामले में भी अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा अहमियत रखते हैं. ऐसे में भारत का रुख बदलना तुर्की की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है.
ग्रीस, स्पेन, इटली जा रहे भारतीय पर्यटक
कुल मिलाकर, भारत और तुर्की के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक तनातनी का सीधा असर उसके पर्यटन उद्योग पर दिख रहा है. भारतीय पर्यटकों की बदली हुई प्राथमिकताएं यह साफ संकेत देती हैं कि विदेश नीति और सुरक्षा मामलों में भारत विरोधी रवैया अपनाने वाले देशों को अब अपने पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का सामना करना पड़ेगा.





