भारत » इधर नीतीश ने नहीं पहनी टोपी, उधर तेजस्वी ने हिना को बना दिया चेहरा, कौन जीतेगा मुस्लिमों का भरोसा?

इधर नीतीश ने नहीं पहनी टोपी, उधर तेजस्वी ने हिना को बना दिया चेहरा, कौन जीतेगा मुस्लिमों का भरोसा?

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Muslim Politics in Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव 2025 में मुस्लिम वोट बैंक पर आरजेडी ने हिना शहाब को उपाध्यक्ष बनाकर दांव खेला, वहीं नीतीश कुमार के टोपी न पहनने से मुस्लिम वोटरों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? क्…और पढ़ें

नीतीश ने नहीं पहनी टोपी...तो तेजस्वी ने शाहबुद्दीन की पत्नी को बना दिया चेहराबिहार में मुस्लिम टोपी और ताज को लेकर सियासत शुरू.

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही मुस्लिम वोट बैंक को साधने की सियासी जंग तेज हो गई है. बिहार की 17% आबादी वाले मुस्लिम मतदाता, खासकर सीमांचल, सिवान और कोसी क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस बार दो घटनाओं ने इस जंग को और रोचक बना दिया है. एक ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने सिवान के पूर्व बाहुबली सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को अल्पसंख्यक मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाकर मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण को मजबूत करने की कोशिश की है. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों की एक सभा में टोपी पहनने से इंकार कर तुष्टिकरण से दूरी का संदेश दिया है. बिहार चुनाव से पहले ये दोनों कदम मुस्लिम वोटरों पर कितना असर डालेंगे?

बिहार में लालू यादव की राजनीति जब से शुरू हुई है मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण उनकी ताकत रही है. 2020 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का बंटवारा, खासकर सीमांचल में एआईएमआईएम को मिला समर्थन और पांच सीटों पर जीत, आरजेडी के लिए सबक था. सिवान में शहाबुद्दीन का प्रभाव आज भी कायम है. ऐसे में उनकी पत्नी हिना शहाब को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देना एक रणनीतिक कदम है. हिना, जो तीन बार लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं, फिर भी मुस्लिम समुदाय में ‘शहीद की पत्नी’ की छवि रखती हैं. उनकी अल्पसंख्यक मोर्चा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की नियुक्ति से आरजेडी उन मतदाताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो शहाबुद्दीन परिवार को सम्मान न मिलने से नाराज थे.

सूत्रों के मुताबिक, हिना के बेटे ओसामा को भी रघुनाथपुर सीट से उतारा जा सकता है, हालांकि मौजूदा विधायक हरिशंकर यादव के टिकट पर सस्पेंस बरकरार है. यह कदम सिवान और आसपास के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में वोटों को एकजुट करने की कोशिश है.

नीतीश का टोपी न पहनने का फैसला

नीतीश कुमार, जो कभी मुस्लिम वोटों को साधने के लिए इफ्तार पार्टियों में टोपी पहनकर और मुस्लिम कल्याण योजनाओं के लिए जाने जाते थे, अब बदले रुख में दिख रहे हैं. 2024 में एनडीए में वापसी के बाद टोपी न पहनने का उनका फैसला बीजेपी के साथ गठबंधन को मजबूत करने और सवर्ण-ओबीसी वोटरों को नाराज न करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. 2015 में महागठबंधन के साथ नीतीश को 78% मुस्लिम वोट मिले थे, लेकिन 2020 में उनके 11 मुस्लिम उम्मीदवारों की हार ने उनकी इस वोट बैंक में पकड़ कमजोर होने का संकेत दिया. टोपी न पहनना मुस्लिम समुदाय में ‘अपमान’ की भावना पैदा कर सकता है, खासकर उन मतदाताओं में जो उन्हें पहले बीजेपी से उदार मानते थे.

मुस्लिम वोटों पर प्रभाव

बिहार में 2.31 करोड़ मुस्लिम मतदाता हैं, जो किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया और सिवान जैसे क्षेत्रों में 20-60% वोट शेयर रखते हैं. 2020 में मुस्लिम वोटों का बंटवारा हुआ, जिसमें AIMIM ने पांच सीटें जीतीं. नीतीश की पसमांदा मुस्लिम योजनाएं और वक्फ बोर्ड सुधार जैसे कदम अब तक मुस्लिम वोटरों को पूरी तरह आकर्षित नहीं कर पाए, खासकर वक्फ बिल पर जेडीयू नेताओं की नाराजगी के बाद. दूसरी ओर तेजस्वी का ‘A टू Z’ फॉर्मूला M-Y समीकरण के साथ वैश्य और कुशवाहा वोटों को भी जोड़ रहा है, जो मुस्लिम वोटों के बंटवारे को रोक सकता है.

हालांकि, प्रशांत किशोर की जन सुराज और ओवैसी की पार्टी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की कोशिश में हैं. जन सुराज की ताजा उपचुनाव रणनीति और एआईएमआईएम की सीमांचल में पकड़ आरजेडी और जेडीयू दोनों के लिए खतरा है. अगर मुस्लिम वोट बंटता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान आरजेडी को हो सकता है, क्योंकि उनकी रणनीति इस वोट बैंक पर टिकी है. ऐसे में हिना शहाब को जिम्मेदारी देना आरजेडी की भावनात्मक रणनीति है, जो सिवान और सीमांचल में मुस्लिम वोटों को एकजुट कर सकती है. वहीं, नीतीश का टोपी न पहनने का फैसला उनके गठबंधन को मजबूत करता है, लेकिन मुस्लिम वोटरों में उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा… और पढ़ें

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