पांच गुना बड़ा खुलासा
नई रिसर्च में सामने आया कि अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे 332 पनडुब्बी घाटियां छिपी हुई हैं. जैसे जमीन पर हमें गहरी घाटियां या खाइयां (जैसे नर्मदा घाटी, ग्रैंड कैन्यन) मिलती हैं, वैसे ही समुद्र के अंदर भी घाटियां होती हैं. इन्हें ही Submarine Canyons कहा जाता है.
दुनिया भर की टीम और डेटा
इस खोज के लिए 40 से ज्यादा देशों की टीमों ने सालों तक रिसर्च की. हाई-रेजॉल्यूशन सोनार डेटा इकट्ठा किया गया और उसके आधार पर समुद्री नक्शा तैयार किया गया. यह पूरा काम Marine Geology नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ है. रिसर्च की अगुवाई यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना और यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के वैज्ञानिकों ने की.
नए नक्शे से पता चला कि कुछ घाटियां 4000 मीटर यानी पूरे 4 किलोमीटर तक गहरी हैं. ये घाटियां पोषक तत्व और पानी को अंटार्कटिका की सतह से उठाकर गहरे समुद्र तक पहुंचाती हैं. यानी ये महज गड्ढे नहीं, बल्कि धरती के पूरे इको-सिस्टम को चलाने वाले रास्ते हैं.
पूर्वी और पश्चिमी अंटार्कटिका का फर्क
रिसर्च में यह भी निकला कि अंटार्कटिका का हर हिस्सा एक जैसा नहीं है. पूर्वी इलाकों की घाटिया ज्यादा फैली हुई और शाखाओं वाली हैं, जो बताती हैं कि यहां की बर्फ लंबे वक्त से स्थिर रही है. वहीं पश्चिमी अंटार्कटिका की घाटियां सीधी और खड़ी हैं, जिससे साफ है कि यहां हालिया ग्लेशियर एक्टिविटी ज्यादा रही है.
ये घाटियां सिर्फ अंटार्कटिका तक सीमित नहीं. इनका असर पूरी धरती के मौसम पर पड़ता है. ठंडा और नमकीन पानी इनसे होकर गहरे महासागर तक जाता है और पूरी दुनिया के तापमान और पोषण का संतुलन बनाए रखता है. लेकिन खतरा यह है कि गहराई का गर्म पानी भी इन्हीं घाटियों से ऊपर आता है और बर्फ़ की परत को तेज़ी से पिघला देता है.
पुराने मॉडल ध्वस्त
अब तक वैज्ञानिक मानते रहे थे कि अंटार्कटिका का समुद्री तल लगभग सपाट है. लेकिन यह खोज उन सारे मॉडलों को उलट देती है. नया एटलस दिखा रहा है कि पिघलने की रफ्तार कितनी तेज़ हो सकती है और आने वाले समय में समुद्र का स्तर कितना ऊपर जा सकता है.
आने वाले वक्त की चेतावनी
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन घाटियों को समझना बहुत ज़रूरी है. क्योंकि यही रास्ते तय करेंगे कि पिघली हुई बर्फ़ कितनी जल्दी महासागर तक पहुँचेगी. और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर के तटीय शहरों और इलाकों पर खतरा मंडराना तय है.





