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भारत ने चीन को दिया कड़ा संदेश: आतंकवाद, सीमा विवाद, ब्रह्मपुत्र, ताइवान पर भारत की स्थिति

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भारत ने चीन को आतंकवाद, सीमा विवाद, ब्रह्मपुत्र और ताइवान पर अपनी स्पष्ट स्थिति बताई. जयशंकर और डोभाल ने वांग यी से कहा कि भारत को भरोसा और पारदर्शिता चाहिए.

बॉर्डर, ब्रह्मपुत्र, ताइवान... चीन के सामने भारत ने हर मुद्दे पर की दोटूक बातचीन के विदेश मंत्री ने जयशंकर और अज‍ित डोभाल से मुलाकात की.
चीन के विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अज‍ित डोभाल ने साफ कर दिया कि चाहे बात आतंकवाद की हो, सीमा विवाद की, ब्रह्मपुत्र के पानी की या फिर ताइवान के मसले की– भारत हर मुद्दे पर अपनी ठोस और स्पष्ट स्थिति रखता है. भारत ने चीन को साफ संदेश दिया कि पड़ोसी रिश्तों में तनाव नहीं, भरोसा और पारदर्शिता चाहिए. भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्‍या-क्‍या बात हुई, इसकी पूरी जानकारी शेयर की है.

आतंकवाद पर साफ-साफ
भारत ने वांग यी से साफ कहा कि आतंक हमारी नेशनल सिक्‍योरिटी और स्‍टेबिल‍िटी के लिए सबसे बड़ा खतरा है. पाकिस्तान से फैले नेटवर्क और सीमा पार हमलों पर भारत ने चिंता जताई. विदेश मंत्रालय के मुताबिक- वांग यी ने भी माना कि आतंकवाद का मुकाबला करना हर देश की प्राथमिकता होनी चाहिए. भारत का मानना है कि चीन को पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए ताकि वह आतंकियों को पनाह और आर्थिक मदद देना बंद करे. भारत की नजर में यह सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी का भी सवाल है.

सीमा मसले पर भारत का रुख
भारत ने दोटूक कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही द्विपक्षीय रिश्तों की नींव है. जयशंकर और एनएसए डोभाल की बातचीत में चीन को स्पष्ट बताया गया कि बार-बार की घुसपैठ, तनातनी और सेना की तैनाती रिश्तों को पीछे धकेलती है. भारत चाहता है कि सीमा निर्धारण और विवादित इलाकों पर बातचीत तेज हो, ताकि लद्दाख जैसी घटनाएं फ‍िर न दोहराई जाएं. भारत के लिए ये मसला सिर्फ भूभाग का नहीं बल्कि रणनीतिक भरोसे का है. जब तक सीमा पर शांति नहीं होगी, तब तक रिश्तों का सामान्यीकरण संभव नहीं.

ब्रह्मपुत्र पर भारत की आपत्ति
विदेश मंत्री जयशंकर ने चीन के मेगा डैम प्रोजेक्ट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र के निचले हिस्सों में पानी का प्रवाह बदलना भारत और बांग्लादेश जैसे निचले प्रवाह वाले देशों के लिए खतरे की घंटी है. इससे असम और पूर्वोत्तर की कृषि, जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर गंभीर असर पड़ेगा. भारत का मानना है कि चीन को इस पर पारदर्शिता दिखानी चाहिए और बिना परामर्श के ऐसे प्रोजेक्ट नहीं उठाने चाहिए. जयशंकर ने साफ कहा कि ब्रह्मपुत्र केवल संसाधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है.

ताइवान मुद्दे पर भारत का जवाब
वांग यी ने ताइवान पर सवाल उठाया तो भारत ने साफ कर दिया कि उसकी नीति स्थिर है. भारत ताइवान को एक इकॉनॉमिक, टेक्नोलॉजिकल और कल्चरल पार्टनर के रूप में देखता है और ये संबंध आगे भी चलते रहेंगे. भारत ने यह भी बताया कि चीन खुद भी ताइवान के साथ इन्हीं क्षेत्रों में सहयोग करता है, तो भारत पर सवाल उठाना उचित नहीं. भारत ने संकेत दिया कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और किसी दबाव में नहीं बदलेगी. इस दोटूक संदेश से चीन को साफ संकेत मिला कि भारत ताइवान के मुद्दे पर झुकने वाला नहीं.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

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बॉर्डर, ब्रह्मपुत्र, ताइवान… चीन के सामने भारत ने हर मुद्दे पर की दोटूक बात

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