भारत » देश के अकेले मुख्यमंत्री, जिनका बेटे ने टीम इंडिया को जिताया वर्ल्ड कप, फिर बना सांसद, बिहार से ताल्लुक

देश के अकेले मुख्यमंत्री, जिनका बेटे ने टीम इंडिया को जिताया वर्ल्ड कप, फिर बना सांसद, बिहार से ताल्लुक

Facebook
Twitter
WhatsApp

क्या आपको मालूम है कि देश के अकेले मुख्यमंत्री कौन हैं, जिनके बेटे ने भारतीय क्रिकेट टीम का कैप पहना. वन-डे खेला और टेस्ट क्रिकेट में भी. 1983 में वर्ल्ड कप क्रिकेट में कपिल देव के नेतृत्व वाली टीम इंडिया को विजेता बनाने में खास भूमिका अदा की. बाद में वह तीन बार से सांसद भी है. ये नेता जिस राज्य में मुख्यमंत्री थे, उसी राज्य के एक और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को आईपीएल की एक टीम में रखा गया. अब वह खुद एक दिग्गज नेता बन चुका है.

अब आपको बताते हैं कि वो मुख्यमंत्री किस राज्य के थे. इसका जवाब है बिहार राज्य. वही राज्य जहां इस समय चुनाव की सरगर्मियां चल रही हैं. माना जा रहा है कि इस राज्य में नवंबर के आसपास चुनाव होने वाला है. भारतीय टीम के जिस दिग्गज क्रिकेटर की बात हो रही है, उनके पिता इसी राज्य के मुख्यमंत्री थे. हालांकि अब काफी समय गुजर चुका है.

बिहार से क्या ताल्लुक

उनका नाम था भगवत झा आजाद. वह वर्ष 1989 में बिहार के मुख्यमंत्री बने. हालांकि उनका कार्यकाल छोटा रहा. उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन पार्टी में आंतरिक मतभेदों के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा. उनके बाद सत्येंद्र नारायण सिन्हा बिहार के मुख्यमंत्री बने.

विजेता वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य

तो अब आप समझ चुके होंगे कि बात किसकी हो रही है. बात कीर्ति आजाद की हो रही है. जो अपने जमाने के धुरंधर क्रिकेटर थे. वह वर्ष 1983 की उस भारतीय टीम के सदस्य थे, जिसने वन-डे क्रिकेट का वर्ल्ड कप पहली बार जीता था. वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैच को भारत के फेवर में टर्न कराने में उनका भी नाम लिया जाता है.

Generated image

सेमीफाइनल मैच में उनकी वो गेंद

सेमीफाइनल मैच इंग्लैंड के खिलाफ था. ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले जा रहे इस मैच उनका सबसे यादगार मैच भी कहा जाता है. इंग्लैंड के आलराउंडर इयान बॉथम खतरनाक बल्लेबाज थे. वह अच्छी शुरुआत कर चुके थे. कपिल देव ने गेंद कीर्ति आज़ाद को थमाई कीर्ति की गेंद घुमी और बाथम पर उस पर तब कैच दे बैठे, जब वह 33 रन बना चुके थे और भारत के लिए सिरदर्द लग रहे थे. इंग्लैंड की टीम लड़खड़ा गई. भारत ने आसानी से जीत हासिल की, फाइनल में प्रवेश किया.

इसी तरह जिम्बाब्वे के खिलाफ जिस मैच में 17 रन पर पांच विकेट गंवाकर संकट में थी, तब उन्होंने कपिलदेव का बहुत अच्छा साथ दिया, जिसमें कपिलदेव ने नाटआउट 175 रनों की पारी खेली. कीर्ति ने नाटआउट 26 रन बनाकर उनका साथ निभाया. भारत ने वो मैच फिर आराम से जीता.

अब तृणमूल कांग्रेस से सांसद

कीर्ति ने 7 टेस्ट और 25 वन-डे मैच खेले. वह घरेलू क्रिकेट में दिल्ली की तरफ से खेलते थे. बेशक कीर्ति के पिता बिहार के बड़े नेता थे लेकिन उनकी पढाई लिखाई दिल्ली में ही हुई. वह यहां के सेंट कोलंबस स्कूल और फिर सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज से पढ़े. उन्होंने दिल्ली रणजी टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया. कीर्ति अब तृणमूल कांग्रेस से सांसद हैं.

तब रणजी ट्रॉफी में अच्छे प्रदर्शन से टीम इंडिया में होता था सेलेक्शन

दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट में उनका सेलेक्शन किसी राजनीतिक दबाव से नहीं हुआ.1980 के दशक में टीम इंडिया के चयन में खासतौर पर रणजी प्रदर्शन और घरेलू रिकॉर्ड को ही अहमियत दी जाती थी. उनकी पहचान एक हार्ड-हिटिंग मिडल ऑर्डर बल्लेबाज़ और ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर की रही. भारत में एक और मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे और मौजूदा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेली. वह हिमाचल प्रदेश की रणजी टीम से खेले. बाद में बीसीसीआई के अध्यक्ष बने. फिर केंद्रीय मंत्री भी.

बिहार के ही पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव क्रिकेटर के रूप में दिल्ली डेयरडेविल्स (IPL) टीम में थे. वह रणजी टीम में बिहार/झारखंड से भी जुड़े रहे. हालांकि अनुराग ठाकुर और तेजस्वी भारत की ओर से कभी नहीं खेले.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी