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Gallantry Awards: जम्मू और कश्मीर में आतंकियों के साथ हुए एक एनकाउंटर में सीआरपीएफ के कांस्टेबल सद्दाम हुसैन ने अपने एक दांव से पूरे ऑपरेशन की बाजी पटल दी थी. कांस्टेबल सद्दाम की जांबाजी के लिए उन्हें शौर्…और पढ़ें
कुछ देर के सफर के बाद तीनों फोर्सेस टीमें उस जंगल के बाहर थी, जहां आतंकियों ने अपना ठिकाना बना रखा था. ज्वाइंट टीम ने जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. एक लंबी कवायद के बाद भारतीय जांबाज उस मकान के करीब थे, जिसमें आतंकी छिपे हुए थे. देखते ही देखते सीआरपीएफ, असम राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल वर्क फोर्स ने उस मकान के चारों तरफ एक अभेद्य घेरा बना दिया. चारों ओर खतरे की आहट थी, लेकिन जवानों का हौसला अडिग था. ऑपरेशन के दौरान, सीआरपीएफ के कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ से मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
अब तक आतंकियों को इस बात का अंदाजा हो चुका था कि इंडियन फोर्सेस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है. इस घेरे को तोड़ने के लिए आतंकियों ने अपनी असॉल्ट राइफलों से अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया. उस वक्त, हर तरफ मौत का साया मंडरा रहा था, लेकिन सद्दाम हुसैन ने अदम्य साहस के साथ अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी. उनका दिल धड़क रहा था, लेकिन इरादे लोहे की तरह मजबूत थे. अब तक के ऑपरेशन के बाद कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को यह समझ में आ चुका था कि जब तक मकान का दरवाजा तोड़कर वह अंदर नहीं जाएंगे, तब तक आतंकियों की राइफलों को खामोश नहीं किया जा सकता.
… सीआरपीएफ के कांस्टेबल सद्दाम ने ले लिया बड़ा फैसला
सद्दाम ने अपनी जान की परवाह किए बगैर मकान के भीतर घुसने का फैसला कर लिया. गोलियों की बौछार के बीच कांस्टेबल सद्दाम हुसैन ने अपने कदम उस मकान की तरफ बढ़ा दिए. हर कदम पर मौत उसका इम्तिहान ले रही थी, लेकिन सद्दाम के हौसले नहीं डगमगाए. उन्होंने अपने यूबीजीएल (अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) को तैयार किया और केवल 25 मीटर की दूरी से सटीक निशाना साधकर एक ग्रेनेड दाग दिया. वह पल ऐसा था, मानो समय ठहर गया हो. ग्रेनेड सीधे आतंकियों के ठिकाने पर जा गिरा. एक जोरदार धमाका हुआ और एक आतंकी गंभीर रूप से घायल हो गया. बाद में, जब सर्च ऑपरेशन पूरा हुआ, वह आतंकी की जान उसके शरीर से निकल चुकी थी.
कांस्टेबल सद्दाम ने पटल दी ऑपरेशन की पूरी बाजी
कांस्टेबल सद्दाम हुसैन ने अपनी इस दिलेरी ने न केवल एक खूंखार आतंकी को ढेर किया, बल्कि पूरे ऑपरेशन को कामयाबी की मंजिल तक पहुंचाया दिया. उनकी यह बहादुरी किसी साधारण सिपाही की नहीं, बल्कि एक योद्धा की थी, जिसने अपनी जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा की. वह पल गर्व का था, जब उनके इस साहस ने आतंकवाद के खिलाफ एक और जीत दर्ज की. इसी के साथ, कांस्टेबल सद्दाम हुसैन सद्दाम हुसैन का यह कारनामा इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया. इस अभूतपूर्व शौर्य, अदम्य साहस और कर्तव्यपरायणता के लिए कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है.

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें
Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to … और पढ़ें
August 15, 2025, 18:44 IST





