विदेश » चमकीला बैंगनी और सफेद रंग… सामने आया दुर्लभ पर्पल केकड़ा, थाईलैंड की रानी से खास कनेक्‍शन

चमकीला बैंगनी और सफेद रंग… सामने आया दुर्लभ पर्पल केकड़ा, थाईलैंड की रानी से खास कनेक्‍शन

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Rare Purple Crabs Spotted: थाईलैंड के केंग क्राचान नेशनल पार्क में दुर्लभ बैंगनी “प्रिंसेस” केकड़ों की तस्वीरें सामने आई हैं. ये केकड़े प्रिंसेस महा चाकरी सिरिन्धॉर्न के नाम पर हैं. करीब चार दशक पहले इसकी खोज ह…और पढ़ें

बैंगनी-सफेद रंग... सामने आया दुर्लभ पर्पल केकड़ा, थाईलैंड की रानी से कनेक्‍शनतस्‍वीरें जारी की गई.
नई दिल्‍ली. थाईलैंड के केंग क्राचान नेशनल पार्क में दुर्लभ बैंगनी रंग के “प्रिंसेस” या “सिरिन्धॉर्न” केकड़ों की तस्वीरें सामने आई हैं. थाईलैंड के डिपार्टमेंट ऑफ नेशनल पार्क्स, वाइल्डलाइफ एंड प्लांट कंजर्वेशन ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को साझा किया है. ये छोटे-से एक इंच लंबे केकड़े अपने चमकीले बैंगनी और सफेद रंग के कारण पांडा क्रैब भी कहलाते हैं. इनका नाम थाईलैंड की प्रिंसेस महा चाकरी सिरिन्धॉर्न के नाम पर रखा गया है.

1986 में दिखी थी पहली झलक
इन केकड़ों को पहली बार साल 1986 में देखा गया था, लेकिन आज भी इन पर गहन शोध नहीं हुआ है. दुर्लभता और छिपे रहने की आदत के कारण इन केकड़ों को देखना बेहद मुश्किल है. विशेषज्ञ इन्हें एक महत्वपूर्ण इकोसिस्टम इंडिकेटर मानते हैं। कहा गया कि इनकी उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि पार्क का प्राकृतिक पर्यावरण स्वस्थ है.

यूनेस्को की वर्ल्‍ड साइट में दिए दर्शन
केंग क्राचान नेशनल पार्क को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है. यह पार्क अपनी जैव-विविधता के लिए प्रसिद्ध है, जहां तेंदुए, भालू, किंग कोबरा और कई अन्य दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं. यहां का जंगल और जल स्रोत न केवल वन्यजीवों का घर हैं, बल्कि थाईलैंड के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं.

पांडा क्रैब भी कहा जाता है
इन केकड़ों की तस्वीरें नेशनल पार्क के बंद होने के सीजन से पहले साझा की गई हैं. थाईलैंड में मानसून के दौरान कई नेशनल पार्क बंद कर दिए जाते हैं, ताकि वन्यजीवों को प्रजनन और प्राकृतिक पुनरुत्थान का समय मिल सके. यही वजह है कि इस समय पांडा क्रैब जैसे दुर्लभ जीवों को देखने का मौका बहुत कम लोगों को मिलता है. वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि पांडा क्रैब की मौजूदगी एक संकेत है कि पार्क का जल और मिट्टी प्रदूषण-मुक्त है. ऐसे संवेदनशील जीव केवल साफ-सुथरे और स्थिर वातावरण में ही फलते-फूलते हैं.

पार्क में देखने आ रहे लोग
इन दुर्लभ जीवों की सुरक्षा और इनके आवास के संरक्षण के लिए स्थानीय प्रशासन और पर्यावरणविद लगातार प्रयास कर रहे हैं. पर्यटकों से भी अपील की जाती है कि वे पार्क में कचरा न फैलाएं और वन्यजीवों को परेशान न करें. इन तस्वीरों का जारी होना एक याद दिलाता है कि जैव-विविधता को संरक्षित रखना केवल सरकार का नहीं बल्कि हर व्यक्ति का दायित्व है.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें

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