विदेश » ताकत के दम पर गला दबा रहा अमेरिका, ईरान जंग के बीच ब्रह्म चेलानी ने क्यों कही ये बात

ताकत के दम पर गला दबा रहा अमेरिका, ईरान जंग के बीच ब्रह्म चेलानी ने क्यों कही ये बात

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Brahma Chellaney Analysis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा पर सख्त आर्थिक घेराबंदी कर दी है, जिससे वहां मानवीय संकट पैदा हो गया है. ब्रह्म चेलानी ने इसे ‘फ्रेंडली टेकओवर’ पर सवाल उठाया है. क्यूबा की जनता भूख और अंधेरे में तड़प रही है.

ताकत के दम पर गला दबा रहा अमेरिका, ईरान जंग के बीच चेलानी ने क्यों कही ये बातZoom

सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने क्यूबा में अमेरिकी नीति पर गंभीर सवाल उठाया है.

Brahma Chellaney Analysis: पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिका एक अन्य मोर्चे पर भी अपनी ताकत के दम पर एक मुल्क का गला दबा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने सरेंडर कराने के लिए उस मुल्क का एक तरह से हुक्का पानी बंद कर दिया है. इस कारण वहां मानवीय संकट पैदा हो गया. लोग भूख से मौत के कगार पर पहुंच गए हैं. अस्पतालों में इलाज नहीं हो पा रहा. जनता पानी के लिए तरसने लगी है. पीने के पानी के पंप बंद हो गए हैं. ये सब इसलिए हो रहा है ताकि उस मुल्क की जनता डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर कर दे. दरअसल, ईरान के साथ इजरायल-अमेरिका की जंग के बीच हम बात कर रहे हैं क्यूबा की. इसको लेकर सामरिक मामलों के जाने माने विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने एक बड़ा सवाल उठाया है कि डोनाल्ड ट्रंप का ये कैसा ‘फ्रेंडली टेकओवर’ है?

एक्स पर एक पोस्ट में चेलानी लिखते हैं- ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर अपनी पुरानी नीति को और सख्त कर दिया. क्यूबा की 1 करोड़ 10 लाख की आबादी आज इंसानी संकट के कगार पर खड़ी है. ये कोई नई बात नहीं कि क्यूबा बिजली बनाने के लिए 90 फीसदी तेल आयात करता है. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला और मैक्सिको से आने वाले तेल पर पूरी तरह रोक लगा दी. अमेरिका की नौसेना ने समुद्र में घेराबंदी इतना टाइट कर दिया कि कोई जहाज क्यूबा तक पहुंच ही नहीं पा रहा. नतीजा? बिजली संकट इतना गहरा कि लाखों लोग बिजली से महरूम हो गए हैं. पानी के पंप बंद हैं, ट्रैक्टर और डिलीवरी ट्रक खड़े, खाने की कीमतें आसमान छू रही हैं और भूख फैल रही है. अस्पतालों में ब्लैकआउट के बीच इलाज मुश्किल हो गया है.

ये कैसा फ्रेंडली टेकओवर

चेलानी ने सवाल उठाया कि ट्रंप इसे फ्रेंडली टेकओवर– यानी दोस्ताना कब्जा कह रहे हैं. लेकिन ये दोस्ताना कहां है? ये तो ताकत के बल पर किसी संप्रभु देश को घुटने टेकने पर मजबूर करने की कोशिश है. चेलानी कहते हैं कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को अगवा कर लिया, ईरान पर हमले तेज किए और अब क्यूबा को निशाना बनाया. ये सब बिना गोली चलाए, सिर्फ आर्थिक घेराबंदी से काम चला रहा है. दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का इस्तेमाल करके समुद्र में तेल के जहाजों को रोकना– ये कोई युद्ध नहीं, लेकिन इंसानों को मारने वाला तरीका जरूर है.

ब्रह्म चेलानी के इस पोस्ट पर कई जानकारी भी अपनी राय दे रहे हैं. एक यूजर एसआर शर्मा लिखते हैं- आपने बिल्कुल सही पकड़ा – अमेरिका युद्ध में कभी सीधे नहीं जीतता, इसलिए हवा और समंदर की ताकत से देशों को अलग-थलग करता है. ईरान में भी यही ट्राई किया, लेकिन वहां अमेरिका फंस गया. ईरान ने हार नहीं मानी और अब क्यूबा में भी यही हो रहा है. लेकिन क्यूबा छोटा देश है, उसकी अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर. ट्रंप का दांव है कि भूख और अंधेरे से लोग विद्रोह करेंगे, सरकार गिरेगी और फिर अमेरिका दोस्ताना तरीके से कब्जा कर लेगा. लेकिन ये नैतिकता का सवाल है. एक सुपरपावर का ये व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कानून को ठेंगा दिखाने जैसा है. चेलानी की चिंता गहरी है. अगर ये तरीका कामयाब हो गया, तो चीन इसे ताइवान पर आजमा सकता है. बिना गोली चलाए, सिर्फ ब्लॉकेड से किसी को झुकाना. अमेरिका का ये मॉडल दुनिया के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है. हर देश को इसकी निंदा करनी चाहिए. भारत जैसे देश जो अपनी संप्रभुता पर गर्व करते हैं, को चुप नहीं रहना चाहिए. क्यूबा की जनता भूख और अंधेरे में तड़प रही है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो अमेरिका की बात नहीं मान रही. ये इंसानियत के खिलाफ है.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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