ईरान युद्ध ने एशिया के देशों के कामकाज पर व्यापक असर डाला है. ज्यादातर देशों में तेल की आपूर्ति या तो ठप हो गई है या बहुत कम है. कुछ देशों में स्टॉक कम हो रहा है. ऐसे में ऊर्जा संकट से बचने और ऊर्जा बचत के लिए कई देशों ने ऊर्जा की कमी से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
कई देशों में तेल की होती कमी का असर कामकाज पर भी पड़ने लगा है. ऊर्जा की कमी को रोकने के लिए देश कई तरह के कदम उठा रहे हैं. क्योंकि इस संघर्ष का कोई अंत नजर नहीं आ रहा. हालांकि दुनिया के कई हिस्सों पर तेल और गैस की आपूर्ति का असर पड़ा है लेकिन एशिया ज्यादा प्रभावित हुआ है. जापान, दक्षिण कोरिया और चीन ने संकट के समय के लिए आरक्षित अपने विशाल तेल भंडार का उपयोग करने की संभावना से इनकार नहीं किया है.
दरअसल इसकी वजह युद्ध की वजह से ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देना है. खाड़ी देशों से एशिया की ओर आने वाला ज्यादातर तेल आमतौर पर इसी रास्ते आता है. ऐतिहासिक रूप से इस रास्ते रोज करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जिसका अधिकांश भाग एशिया की ओर जाता है.
थाईलैंड में वर्क फ्राम होम
थाईलैंड ने घर से काम करने का आदेश जारी किया गया है. | सरकार का निर्देश है कि जहां संभव हो, कर्मचारी घर से काम करेंगे; सरकारी कार्यालयों में एसी का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पर सेट किया जाएगा. अधिकारियों को विदेश यात्राओं से बचने के लिए कहा गया है.
फिलीपींस में 4 डे वीक वर्क
फिलीपींस में 4 दिन का कार्य सप्ताह. राष्ट्रपति के आदेश के बाद फिलीपींस में चार दिवसीय काम करने का वीक लागू कर दिया गया है. इस देश में 90% तेल खाड़ी देशों से ही आता है.
ईरान युद्ध के चलते एशियाई देशों पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसके चलते कुछ देशों में वर्क फ्राम होम लागू हो गया है. (AI News18 Image)
वियतनाम ने कारपूल के लिए कहा
वियतनाम ने कारपूल के लिए कहा है. कंपनियों से कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने के अलावा जनता से निजी वाहनों का उपयोग सीमित करने के साथ सार्वजनिक परिवहन या कारपूलिंग का विकल्प चुनने का आग्रह किया है. हनोई के पेट्रोल पंप पर वाहनों की लंबी कतार भी देखी गई. साथ ही सरकार ने निजी और स्थानीय व्यवसायों को सलाह दी है कि वे तेल की आपूर्ति में बाधा को देखते हुए अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित करें.
श्रीलंका में बढ़े दाम
श्रीलंका ने कीमतें बढ़ाईं. जमाखोरी और घबराहट में खरीदारी पर अंकुश लगाने के लिए श्रीलंका ने खुदरा ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि की है. श्रीलंका में सालभर से ज्यादा पहले वित्तीय स्थितियों की वजह से देश में इतना तेल भी नहीं रह गया था कि वाहन चल पाएं.
एशिया के कुछ देशों ने पेट्रोल पंपों पर तेल की राशनिंग कर दी है, तो कई देशों ने कीमतें बढ़ाने की घोषणा कर दी है. पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें भी देखी जा रही हैं (AI News18 Image)
पाकिस्तान ने स्कूल बंद किये
पाकिस्तान ने एक दर्जन से अधिक मितव्ययिता उपायों की रूपरेखा तैयार की, जिनमें स्कूल बंद करना शामिल है. ईंधन बचाने के लिए सरकार ने पूरे देश में स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया है. पंजाब प्रांत में शिक्षण संस्थान 31 मार्च 2026 तक बंद रखे गए हैं. मंत्रिमंडल मंत्रियों के वेतन पर अस्थायी रोक लगाई गई है, अगले सप्ताह से दो सप्ताह के लिए स्कूल बंद रहेंगे जबकि विश्वविद्यालय ऑनलाइन कक्षाओं में स्थानांतरित हो जाएंगे. साथ ही सऊदी से वैकल्पिक आपूर्ति मांगी गई.
साथ ही संघीय कार्यालयों में 4-दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है. 50फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के लिए कहा गया है.
ताइवान ने बढ़ाई कीमतें
ताइवान का 96 फीसदी तेल बाहर से ही आता है. इसमें से 60फीसदी तेल जलडमरूमध्य से ही आता है. अब ये देश कीमतों में वृद्धि करके आपूर्ति सुनिश्चित करने की होड़ में लगा है.
बांग्लादेश ने ईंधन का ऑर्डर दिया
हालांकि भारत ने बांग्लादेश को बड़े पैमाने पर तेल भेजा है लेकिन वहां भी तेल की कमी शुरू हो गई है. लिहाजा तेल की राशनिंग; बिजली बचाने और परिवहन की आवश्यकता कम करने के लिए विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया.
भारत में हवाई किराए बढ़े
जेट फ्यूल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. एयरलाइंस ने लॉन्ग-हॉल फेयर 15फीसदी तक बढ़ाए हैं. एलपीजी वितरण में भी समय लग रहा है. हालांकि पेट्रोल और डीजल को लेकर आपूर्ति सामान्य तरीके से चल रही है. लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि कीमतें बढ़ सकती हैं.
कोरिया बढ़ा सकता है कीमत
दक्षिण कोरिया 30 सालों में पहली बार पेट्रोल पंपों से मिलने वाले तेल की कीमतों में बढोतरी कर सकता है.
आस्ट्रेलिया में मांग में भारी उछाल
ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने कहा कि आपूर्ति में कोई समस्या नहीं है, लेकिन “मांग में भारी उछाल” आया है. सरकार ने किसानों सहित खरीदारों को आश्वस्त करने की कोशिश की है, जो सर्दियों के महत्वपूर्ण बजट को देखते हुए डीजल और अन्य ईंधनों की उपलब्धता पर नजर रख रहे हैं.
यूरोप में सीधे नहीं असर
हालांकि यूरोप की निर्भरता सीधे तौर पर उतनी नहीं है, लेकिन जेट फ्यूल और डीजल की कमी के कारण वहां परिवहन और बिजली की लागत तेजी से बढ़ रही है. यूरोप अपनी जेट फ्यूल की लगभग 50% मात्रा खाड़ी देशों से आयात करता है, ये होमुर्ज जलडमरूमध्य से होकर आता है. नॉर्थवेस्ट यूरोप में जेट फ्यूल की कीमत हाल ही में $1,000–1,500 प्रति टन तक पहुंच गई है.





