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भारतीय क्रिकेटर सलिल अंकोला का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. सचिन तेंदुलकर के साथ डेब्यू करने वाले इस तेज गेंदबाज का करियर चोटों की वजह से महज 28 साल की उम्र में खत्म हो गया. उन्होंने एक्टिंग में नाम कमाया, लेकिन निजी जिंदगी में वह शराब की गंभीर लत का शिकार हो गए. एक वक्त ऐसा भी आया जब वह मौत के करीब पहुंच गए थे और 12 बार आईसीयू में भर्ती हुए. हालांकि, परिवार के साथ और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से उन्होंने इस अंधेरे को मात दी. आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और भारतीय क्रिकेट में बतौर चयनकर्ता अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

सलिल अंकोला की जिंदगी ‘जीरो से हीरो’ बनने की कहानी है.
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में सलिल अंकोला एक ऐसा नाम थे जिनसे बड़ी उम्मीदें थीं. उन्होंने 1989 में सचिन तेंदुलकर के साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ अपना डेब्यू किया था. दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज में रफ्तार भी थी और स्विंग भी, यही वजह थी कि उन्हें 1996 के वर्ल्ड कप की टीम में भी जगह मिली. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. लगातार चोटों ने उनके चमकते करियर पर ब्रेक लगा दिया. महज 28 साल की उम्र में जब एक खिलाड़ी अपने चरम पर होता है, सलिल अंकोला को भारी मन से क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा. मैदान छूटने का दर्द छोटा नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ग्लैमर की दुनिया यानी एक्टिंग में कदम रखा. ‘कुरुक्षेत्र’ फिल्म में संजय दत्त के साथ पुलिस वाले का रोल हो या ‘सीआईडी’ और ‘कोरा कागज’ जैसे सुपरहिट टीवी शोज, सलिल अपनी पर्सनैलिटी और एक्टिंग से घर-घर में पहचान बनाने में कामयाब रहे.
सलिल कैमरे के सामने जितने फिट और खुश दिखते थे, असल जिंदगी में उनकी लड़ाई उतनी ही खौफनाक थी. क्रिकेट छूटने का खालीपन उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा था, जिसे भरने के लिए उन्होंने शराब का सहारा लिया. धीरे-धीरे यह शौक एक जानलेवा बीमारी बन गया. 1999 से लेकर 2011 तक का दौर उनके जीवन का सबसे काला अध्याय था. हालात इतने बदतर हो गए थे कि वह दिन-रात नशे में डूबे रहते थे. क्रिकेट से उन्हें इतनी चिढ़ हो गई थी कि उन्होंने मैच देखना तक छोड़ दिया क्योंकि वह उन्हें उनके अधूरे सपनों की याद दिलाता था. इस लत की वजह से उनकी सेहत गिरती चली गई. वह कई बार रिहैब सेंटर गए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. एक दौर ऐसा भी आया जब उन्हें 12 बार आईसीयू में भर्ती होना पड़ा और तीन बार तो डॉक्टरों ने उन्हें लगभग मृत घोषित कर दिया था.
क्रिकेट सेलेक्टर के रूप में में दूसरी पारी की शुरू
कहते हैं न कि अंत भला तो सब भला. 2011 के वर्ल्ड कप ने उनके अंदर जीने की एक नई लौ जलाई. परिवार के अटूट साथ और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने मौत के मुंह से वापसी की और शराब की लत को जड़ से उखाड़ फेंका. आज सलिल न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि वापस उसी खेल की सेवा कर रहे हैं जिसे उन्होंने कभी दिल से चाहा था. वह मुंबई क्रिकेट संघ के मुख्य चयनकर्ता रहे और हाल में भारतीय राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई. सलिल अंकोला की जिंदगी हमें सिखाती है कि चाहे आप कितनी भी बुरी तरह गिर जाएं, अगर आपके अंदर उठने का जज्बा है, तो आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं. आज वह युवाओं के लिए एक मिसाल हैं कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, सवेरा जरूर होता है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
March 01, 2026, 08:22 IST





