मनोरंजन » ‘सच असहज होता है’, सुदीप्तो सेन की ‘चरक’ की बढ़ी मुश्किलें, फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड से नहीं मिली मंजूरी

‘सच असहज होता है’, सुदीप्तो सेन की ‘चरक’ की बढ़ी मुश्किलें, फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड से नहीं मिली मंजूरी

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‘द केरल स्टोरी’ फेम निर्देशक सुदीप्तो सेन की अपकमिंग फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है. अपनी इस फिल्म को लेकर सुदीप्तो सेन एक बार फिर विवादों में फंसे नजर आ रहे हैं. उनकी इस आने वाली फिल्म चरक को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने फिलहाल सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है. इस मामले को रिव्यू कमेटी के पास भेज दिया है. ये सुदीप्तो की ये मच अवेटेड फिल्म 6 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी.

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फिल्म को लेकर नहीं मिल रही राहत

नई दिल्ली. सुदीप्तो सेन इन दिनों अपनी अपकमिगं फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर चर्चा में हैं. उनकी ये फिल्म रिलीज से पहले ही विवादों में घिरती नजर आ रही हैं. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने भी इस फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है. फिल्म के डायरेक्टर का कहना है कि फिल्म कुछ कथित तांत्रिक प्रथाओं पर आधारित एक तथ्यात्मक कहानी को पेश करती है, लेकिन सेंसर की आपत्तियों के बाद अब इसकी रिलीज पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

द केरल स्टोरी’ फेम निर्देशक सुदीप्तो सेन की फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का जब टीजर सामने आया था, तो इसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया था. टीजर में भारत के ग्रामीण इलाकों में होने वाले अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और तंत्र-मंत्र से जुड़ी चीजों पर सवाल उठाए गए. लेकिन अब इस फिल्म पर विवाद गर्माता जा रहा है. फिल्म को सेंसर बोर्ड से भी अनुमति नहीं मिली है.

मेरी फिल्म कोई कल्पना से नहीं बनी

तकरीबन ढाई साल पहले जब ‘द केरल स्टोरी’ को लेकर देशभर में खूब हंगामा हुआ था तो सुदीप्तो सेन सुर्खियों में आ गए थे. अब उनकी अगली ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ की रिलीज से पहले ही वह फिर से सुर्खियों में छा गए हैं. उन्होंने फिल्म का टीजर सामने आने के कुछ समय बाद हमारी सहयोगी वेबसाइट News18English से बातचीत अपनी फिल्म को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनकी ये फिल्म कुछ खास हिंदू पंथों में चल रही कथित तांत्रिक और गूढ़ प्रथाओं पर बेस्ड एक डॉक्यूमेंटेशन है. उन्होंने कहा कि मेरी फिल्म में जो दिखाया जा रहा है, वो कोई कल्पना नहीं है, बल्कि लिखित एविडेंस पर बेस्ड है. फिल्म में मानव बलि और अनुष्ठानिक नरभक्षण जैसे गंभीर आरोपों को भी दिखाया गया है.

कट्स नहीं, फिल्म पर उठ रहे सवाल

सुदीप्तो सेन ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा किCBFC ने खास तौर पर नरभक्षण वाले सीन पर आपत्ति जताई है. उन्होंने फिल्म पर कुछ कट्स लगाने के सुझाव भी दिए हैं. लेकिन उन्हें साफ तौर पर नहीं बताया जा रहा है कि आखिर सर्टिफिकेट को क्यों रोका गया है. उन्होंने तो ये भी कहा कि वो अपनी फिल्म से कुछ कुछ सीन हटाने को भी तैयार हैं, लेकिन सवाल सिर्फ कट्स का नहीं बल्कि उनकी पूरी फिल्म पर उठाया जा रहा है.

बता दें कि सुदीप्तो सेन अपनी बात रखते हुए कहा कि वह ये फिल्म किसी विचारधारा को भड़काने के लिए नहीं बनाए हैं. वह सिर्फ अवैध और अंधविश्वासी प्रथाओं को उजागर करने की कोशिश को बयां कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि मैंने सिर्फ सवाल उठाया कि अगर आस्था के नाम पर कुछ गैरकानूनी हो रहा है तो क्या सिनेमा को चुप रहना चाहिए. उनकी फिल्म में लापता बच्चों के इस मामले को भी छुआ है कि कुछ किडनेपिंग तो अनुष्ठानों से जुड़ी हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि जब फिल्म का टॉपिक असहज होता है तो लोग उसे जानबूझकर की गई ठेस मानने लगते हैं.

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Munish Kumar

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें

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