मनोरंजन » सीरियल ‘रामायण’ से लेकर फिल्म ‘गंगाजल’ तक, कैसा रहा एक्टर अखिलेन्द्र मिश्रा का फिल्मी सफर? बताई सारी कहानी

सीरियल ‘रामायण’ से लेकर फिल्म ‘गंगाजल’ तक, कैसा रहा एक्टर अखिलेन्द्र मिश्रा का फिल्मी सफर? बताई सारी कहानी

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कानपुर: शहर के अरमापुर पीजी कॉलेज में आयोजित साहित्य संगोष्ठी में शामिल होने पहुंचे बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता अखिलेन्द्र मिश्रा ने अपने जीवन के अनुभव, अभिनय की यात्रा और साहित्य के महत्व पर खुलकर बात की. उन्होंने बेहद सरल शब्दों में बताया कि एक कलाकार के लिए सीखना कभी खत्म नहीं होना चाहिए और रंगमंच ही अभिनय की असली पाठशाला है.

रंगमंच ने बनाया मजबूत कलाकार

अखिलेन्द्र मिश्रा ने कहा कि उनका सफर बिहार के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ और मेहनत के दम पर वह बॉलीवुड तक पहुंचे. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने रंगमंच से अभिनय सीखा और वहीं से उन्हें आत्मविश्वास मिला. उनके अनुसार, थिएटर एक ऐसा मंच है, जहां कलाकार खुद को निखारता है और अभिनय की बारीकियों को समझता है.

उन्होंने कहा, ‘इंसान को हमेशा सीखते रहना चाहिए. जिस दिन सीखना बंद हो जाता है, उसी दिन कलाकार के अंदर की ऊर्जा भी कम होने लगती है.’ उन्होंने यह भी बताया कि सिखाने और सीखने का सिलसिला ही किसी भी कलाकार को जिंदा और सक्रिय बनाए रखता है.

बड़े किरदारों से बनी अलग पहचान

अखिलेन्द्र मिश्रा ने अपने करियर में कई ऐसे किरदार निभाए हैं, जिनसे उन्हें घर-घर में पहचान मिली. टीवी सीरियल “चंद्रकांता” में क्रूर सिंह का किरदार आज भी लोगों को याद है. इसके अलावा उन्होंने “रामायण” में रावण की भूमिका निभाई, जिससे उन्हें काफी लोकप्रियता मिली. फिल्मों की बात करें तो उन्होंने “सरफरोश” में मिर्ची सेठ, “लगान” में अर्जन लोहार और “द लीजेंड ऑफ भगत सिंह” में चंद्रशेखर आजाद जैसे दमदार किरदार निभाए. “गंगाजल”, “तर्कीब”, “वीरगति”, “काबिल” और “अतिथि तुम कब जाओगे” जैसी कई बड़ी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी.

विज्ञान का छात्र, लेकिन दिल में बसता रहा साहित्य

साहित्य संगोष्ठी में बोलते हुए उन्होंने बताया कि वह पढ़ाई में विज्ञान के छात्र रहे हैं, लेकिन घर का माहौल साहित्यिक होने की वजह से बचपन से ही उनकी रुचि किताबों और कहानियों में रही. यही वजह रही कि धीरे-धीरे उनका झुकाव अभिनय की ओर बढ़ता गया.

उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने नाटक किए, फिर फिल्मों में काम करने का मौका मिला और अब वेब सीरीज तक उनका सफर पहुंच चुका है. उनके मुताबिक, साहित्य इंसान को सोचने और समझने की ताकत देता है. यह हर इंसान की जिंदगी से जुड़ा हुआ है और जीवन को गहराई से समझने में मदद करता है.

OTT से बढ़े मौके, नई प्रतिभाओं को मिला मंच

मनोरंजन जगत में आए बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म्स के आने से इंडस्ट्री में काम के मौके काफी बढ़े हैं. अब ज्यादा से ज्यादा लोग इस क्षेत्र में आ पा रहे हैं और नई प्रतिभाओं को अपनी पहचान बनाने का मौका मिल रहा है. उन्होंने कहा कि पहले मौके सीमित थे, लेकिन अब डिजिटल माध्यम के कारण कलाकारों को काम मिलने के रास्ते खुल गए हैं. उनके अनुसार, सबसे जरूरी बात यही है कि कलाकार को काम मिलता रहे, क्योंकि काम ही उसे आगे बढ़ाता है.

कानपुर से खास लगाव, मंदिरों में लगाई हाजिरी

कानपुर से अपने जुड़ाव पर बात करते हुए अखिलेन्द्र मिश्रा ने कहा कि इस शहर में आना उन्हें हमेशा अच्छा लगता है. उन्होंने कहा कि यहां की हवा में आज भी क्रांति की भावना और एक अलग तरह की ऊर्जा महसूस होती है. उन्होंने अपने दौरे के दौरान पनकी हनुमान मंदिर और बाबा आनंदेश्वर (परमट) मंदिर में भी दर्शन किए. उन्होंने बताया कि इन स्थानों पर आकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है और एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.

संगोष्ठी में मौजूद छात्रों और साहित्य प्रेमियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कला, साहित्य और समाज एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. अगर इंसान अपने अंदर की संवेदनाओं को समझना चाहता है, तो उसे साहित्य और कला से जुड़ना चाहिए. यही चीजें इंसान को बेहतर बनाती हैं और जीवन को नई दिशा देती हैं.

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