मनोरंजन » जया बच्चन के लिए गाया पहला हिंदी गाना, गाए 10000 से ज्यादा गाने, जीते 3 नेशनल अवॉर्ड, फिर गुमनामी में हुई मौत

जया बच्चन के लिए गाया पहला हिंदी गाना, गाए 10000 से ज्यादा गाने, जीते 3 नेशनल अवॉर्ड, फिर गुमनामी में हुई मौत

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भारतीय सिनेमा में म्युजिक फिल्मों की रीढ़ रहा है. इन वर्षों में कई सिंगर्स ने भारतीय म्युजकि इंडस्ट्री में योगदान दिया है. कुछ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, तो कुछ अपना नाम नहीं बना सके. उनके एक सिंगर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री में इस एक्ट्रेस 50 साल पूरे किए थे. साल 2023 में अपने घर में मृत पाई गई थीं.

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इस सिंगर ने हिंदी, तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, और बंगाली समेत 19 भाषाओं में 10,000 गाने गाकर रिकॉर्ड बनाया. अपने करियर में उन्होंने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते. इसके बावजूद उन्हें कभी बहुत बड़ी शोहरत नहीं मिली और वे एक ‘रहस्य’ बनी रहीं. 2023 में इस एक्ट्रेस की 77 साल की उम्र मौत हो गई.

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यह गायिका कोई और नहीं, बल्कि वाणी जयराम हैं. वाणी जयराम का जन्म 1945 में वेल्लोर, तमिलनाडु में हुआ था. वे नौ भाई-बहनों में पांचवीं थीं. वाणी का संगीत से रिश्ता बचपन से ही था. उनके परिवार में संगीत पहले से ही गहराई से जुड़ा हुआ था, इसलिए वाणी जयराम का संगीत में आना स्वाभाविक था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बचपन में वे रेडियो सीलोन पर बजने वाले हिंदी गानों के साथ गुनगुनाया करती थीं. (फोटो साभारः फेसबुक @TimelessIndianMelodies)

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म्युजिक के प्रति उनके प्यार ने उन्हें आठ साल की उम्र में ऑल इंडिया रेडियो मद्रास पर अपना डेब्यू करने का मौका दिलाया. वाणी जयराम ने क्वीन मैरी कॉलेज, मद्रास यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की और संगीत इंडस्ट्री में आने से पहले कई सालों तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में काम किया. सरकारी नौकरी करने के बावजूद वाणी जयराम ने संगीत से अपना लगाव नहीं छोड़ा.

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वाणी जयराम ने ठुमरी, ग़ज़ल और भजन की बारीकियां सीखीं और इन्हें गाना भी सीखा. उनका करियर तब नया मोड़ लेता है जब 1969 में मुंबई के एक कॉन्सर्ट में उनकी मुलाकात संगीतकार वसंत देसाई से हुई. उस समय वसंत देसाई दिग्गज गायक कुमार गंधर्व के साथ एक मराठी एलबम पर काम कर रहे थे. उनकी आवाज़ से प्रभावित होकर वसंत देसाई ने उन्हें कुमार गंधर्व के साथ ‘रिणानुबंधाचा’ गाना गाने का मौका दिया. रिलीज के बाद यह एलबम मराठी श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ और वाणी जयराम के लिए सफलता के नए रास्ते खुले.

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साल 1971 में वाणी जयराम ने वसंत देसाई की फिल्म ‘गुड्डी’ के लिए ‘बोले रे पपीहरा’ गाया. यह गाना तुरंत ही हिट हो गया और वाणी जयराम रातों-रात स्टार बन गईं. अपने करियर में वाणी जयराम ने ‘आशीर्वाद’, ‘पिकनिक’ और ‘पाकीज़ा’ जैसी फिल्मों में शानदार गाने गाए. उन्होंने फिल्म ‘आईना’ में आशा भोसले के साथ ‘दुल्हन बड़ी जादूजानी’ गाया. इसके अलावा किशोर कुमार के साथ ‘प्यार कभी कम नहीं करना’ गाया, जो काफी हिट हुआ.

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हालांकि वाणी जयराम ने हिंदी सिनेमा में ज्यादा गाने नहीं गाए, लेकिन दक्षिण भारतीय सिनेमा में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई. उन्होंने इलैयाराजा और एम.एस. विश्वनाथन जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ हजारों गाने गाए. अपने जीवन में उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान मिले, जिनमें तीन राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं. वाणी जयराम सबसे कम उम्र में ‘संगीत पीठ सम्मान’ पाने वाली कलाकार बनीं. उन्हें 1975 में तमिल, 1980 और 1991 में तेलुगु के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्वगायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला.

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इसके अलावा उन्हें ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात राज्य सरकारों से भी पुरस्कार मिले. 2012 में उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत में योगदान के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड – साउथ से नवाजा गया. 2017 में न्यूयॉर्क सिटी में हुए NAFA इवेंट में उन्हें बेस्ट फीमेल सिंगर का अवॉर्ड मिला.

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वाणी जयराम का 4 फरवरी 2023 को 77 साल की उम्र में गिरने से निधन हो गया. वह अपने घर में मृत पाई गई थीं. कुछ दिन पहले ही, 26 जनवरी 2023 को भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण देने की घोषणा की थी. उनके योगदान और संगीत इंडस्ट्री पर प्रभाव को याद करते हुए कई राजनीतिक नेता और संगीत जगत की हस्तियां उनके घर पहुंचीं और श्रद्धांजलि दी.

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जया के लिए गाया पहला हिंदी गाना, गाए 10000 से ज्यादा गाने, गुमनामी में हुई मौत

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