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कपूर खानदान के बेटे राजीव कपूर का फिल्मी सफर काफी मुश्किल भरा रहा. उन्हें शुरुआती पहचान अपने चाचा शम्मी कपूर जैसी शक्ल और स्टाइल की वजह से मिली, जिससे उन्हें ‘लवर बॉय’ वाली फिल्में मिलीं. उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ राज कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ थी, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. हालांकि, यह सफलता स्थायी नहीं रही और बाद की फिल्में फ्लॉप होने पर उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया. निजी जीवन में स्वास्थ्य समस्याओं और शराब की लत के कारण उन्होंने कम उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया.

शम्मी कपूर से एक्टर की सूरत काफी मिलती थी. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: बॉलीवुड में जब भी कपूर खानदान की बात होती है, तो दिमाग में राज कपूर से लेकर रणबीर कपूर जैसे बड़े स्टार्स के नाम आते हैं. लेकिन इसी खानदान में एक ऐसे कलाकार भी थे, जिनका फिल्मी सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा—वो थे राजीव कपूर. आज 9 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि है, तो चलिए उनकी जिंदगी की कुछ ऐसी बातें जानते हैं जो शायद आपको न पता हों. दिलचस्प बात ये है कि राजीव को पहचान दिलाने में उनके पिता राज कपूर से कहीं ज्यादा उनके चाचा शम्मी कपूर का हाथ रहा.
राजीव कपूर खुद भी मानते थे कि उनका लुक और स्टाइल हूबहू उनके चाचा शम्मी कपूर जैसा था. 1983 में जब उनकी पहली फिल्म ‘एक जान हैं हम’ आई, तो उसमें शम्मी कपूर ने उनके पिता का रोल किया था. उस वक्त लोगों को राजीव में शम्मी कपूर की झलक दिखती थी और इसी वजह से उन्हें वैसी ही ‘लवर बॉय’ वाली फिल्में मिलने लगीं. हालांकि, बाद में राजीव को लगा कि सिर्फ नकल से काम नहीं चलेगा, उन्हें अपनी खुद की अलग पहचान बनानी होगी, जिसके बाद उन्होंने अपने स्टाइल पर काम करना शुरू किया.
राज कपूर ने ऑफर की फिल्म
राजीव के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब उनके पिता राज कपूर ने उन्हें फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ ऑफर की. राजीव अपने पिता की इतनी इज्जत करते थे कि उन्हें ‘सर’ बुलाते थे. इस फिल्म के लिए उन्होंने अपनी बाकी सारी फिल्मों की डेट्स कैंसिल कर दी थीं. फिल्म रिलीज हुई और सुपरहिट रही, जिससे राजीव रातों-रात बड़े स्टार बन गए. लगा कि अब वो लंबी रेस के घोड़े साबित होंगे, लेकिन बदकिस्मती से ये कामयाबी ज्यादा दिन नहीं टिकी.
डायरेक्शन में हाथ आजमाया
‘राम तेरी गंगा मैली’ के बाद राजीव ने ‘लवर बॉय’ और ‘हम तो चले परदेस’ जैसी कई फिल्में कीं, पर एक भी नहीं चली. जब एक्टिंग में बात नहीं बनी, तो उन्होंने डायरेक्शन में हाथ आजमाया और ‘प्रेम ग्रंथ’ जैसी फिल्में बनाईं. लेकिन पर्सनल लाइफ में शराब की लत और गिरती सेहत ने उन्हें काफी तोड़ दिया और बहुत कम उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. राजीव कपूर की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे खानदान कितना भी बड़ा क्यों न हो, अपनी पहचान बनाना और उसे टिकाए रखना फिल्म इंडस्ट्री में सबसे मुश्किल काम है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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February 09, 2026, 08:01 IST





