साहित्य » लिखने लिखाने की बीमारी है कौन सा हस्पताल में बिस्तर बदलना है

लिखने लिखाने की बीमारी है कौन सा हस्पताल में बिस्तर बदलना है

Facebook
Twitter
WhatsApp

 

मालूम है कि कुछ भी कहीं भी बदला नहीं है सालभर में
ना ही आगे बदलना
है

किसलिए तोलना है मिट्टी को हवा को पानी को
रहने दे उन्हें अभी संभलना है

सच सच है सच को रहने देना है सच कहना नहीं है
रेत पर नंगे पाँव टहलना है

निशान अपने आप ही  मिट जाएंगे समय के साथ
थोड़ा
झूठ को बस संभलना है


कौन निराश है किसने कहा है बुरी बात है सब ठीक तो है
बिना डर रात में निकलना है

मौत सबको आती है एक दिन रोज का डरना अच्छा नहीं है
समय को बस फिसलना है


इसकी कुछ लिख कर उसकी कुछ लिख देने के बाद ही
घर से बाहर निकलना है

शहर में होती हैं अफवाहें ध्यान नहीं देना है
मुसकुराते हुए गली गली टहलना है


अपनी लिखने कि हिम्मत होती तो कितने होते अर्जुन उठाते गांडीव
सब बहलना है

‘उलूक’ साल को जाना ही होता है एक दिन
तुम्हें भी निकलना है
उसे भी निकलना है



चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी