नई दिल्ली (Australia Post-Study Work Visa Guide). क्या आप मेलबर्न की गलियों या सिडनी के ओपेरा हाउस के साये में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं? ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना सिर्फ आधी जंग है, असली रोमांच तो डिग्री हाथ में लेकर वहां के जॉब मार्केट में उतरने के बाद शुरू होता है. कंगारू देश ने वर्क वीजा नियमों में ऐसे ‘बाउंसर्स’ फेंके हैं, जिसने लोगों के होश उड़ा दिए हैं. ऑस्ट्रेलिया के नए वीजा नियमों का गणित समझना जरूरी है, वरना डिग्री होते हुए भी बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ सकता है.
ग्रेजुएट वीजा (Subclass 485): आपका वर्किंग लाइसेंस
पढ़ाई खत्म होते ही सबसे पहले आपको ‘टेम्पररी ग्रेजुएट वीजा’ की जरूरत होती है. यह वीजा ऑस्ट्रेलिया में बिना किसी स्पॉन्सर के किसी भी कंपनी में फुल टर्म काम करने की आजादी देता है. यह एक तरह से आपके करियर का ‘लॉन्चपैड’ है.
किस डिग्री पर कितना ‘स्टे बैक’?
अब आपकी डिग्री तय करेगी कि आप वहां कितने साल रुक पाएंगे.
- बैचलर: 2 साल
- मास्टर्स (कोर्सवर्क): 2 साल
- मास्टर्स (रिसर्च): 3 साल
- पीएचडी: 4 साल.
पिछले साल तक मिलने वाला 2 साल का एक्स्ट्रा बोनस अब कुछ खास कोर्सेज तक सीमित कर दिया गया है.
35 साल का ‘कट-ऑफ’, सबसे बड़ा बदलाव
ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने साफ कर दिया है कि उन्हें युवा प्रोफेशनल चाहिए. इसलिए अब इस वर्क वीजा के लिए आवेदन करने की अधिकतम उम्र 35 साल कर दी गई है. अगर आप मास्टर्स या पीएचडी करने जा रहे हैं और आपकी उम्र 35 पार है तो आपको अपनी करियर प्लानिंग दोबारा देखनी होगी.
रीजनल एरिया का ‘ट्रम्प कार्ड’
अगर आप भीड़भाड़ वाले सिडनी या मेलबर्न को छोड़कर पर्थ, एडिलेड या गोल्ड कोस्ट जैसे ‘रीजनल’ इलाकों की यूनिवर्सिटी चुनते हैं तो आपको 1 से 2 साल का अतिरिक्त वर्क परमिट मिल सकता है. यह पीआर (PR) की रेस में आपको दूसरों से बहुत आगे ले जाता है.
अंग्रेजी का बढ़ा ‘लेवल’
ऑस्ट्रेलिया अब सिर्फ स्किल्स नहीं, बेहतरीन कम्युनिकेशन भी मांग रहा है. वीजा के लिए जरूरी इंग्लिश स्कोर (IELTS/PTE) में बढ़ोतरी की गई है. साथ ही, टेस्ट की वैधता की अवधि को भी 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया गया है. इससे आपकी भाषा का ज्ञान ‘अप-टू-डेट’ रहेगा.
ऑस्ट्रेलिया पोस्ट-स्टडी वर्क (PSW) वीजा: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या 35 वर्ष से अधिक आयु के उम्मीदवार अब ऑस्ट्रेलिया में वर्क वीजा नहीं पा सकते?
नए नियमों के अनुसार, सबक्लास 485 (ग्रेजुएट वीजा) के लिए अधिकतम आयु सीमा अब 35 वर्ष कर दी गई है. हालांकि, मास्टर्स बाय रिसर्च और पीएचडी (PhD) करने वाले उम्मीदवारों को इसमें छूट दी गई है. वे 50 वर्ष की आयु तक आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, हांगकांग और ब्रिटिश ओवरसीज पासपोर्ट धारकों के लिए भी आयु सीमा 50 वर्ष ही रखी गई है.
ऑस्ट्रेलिया में ग्रेजुएशन के बाद मैं कितने समय तक रुक सकती हूं?
ऑस्ट्रेलिया में रुकने की अवधि आपकी डिग्री पर निर्भर करती है. बैचलर डिग्री और मास्टर्स (कोर्सवर्क) के लिए यह 2 साल है. मास्टर्स (रिसर्च) के लिए 3 साल और पीएचडी छात्रों के लिए 4 साल की अवधि तय की गई है. चुनिंदा कोर्सेज के लिए मिलने वाले ‘एक्स्ट्रा एक्सटेंशन’ को काफी सीमित कर दिया गया है.
’रीजनल ऑस्ट्रेलिया’ में पढ़ाई करने का क्या फायदा है?
अगर आप सिडनी, मेलबर्न या ब्रिस्बेन जैसे प्रमुख शहरों के बाहर (जैसे एडिलेड, पर्थ या तस्मानिया) पढ़ाई करते हैं तो आप ‘सेकंड पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा’ के लिए पात्र हो सकते हैं. यह आपके मूल वीजा की अवधि के अलावा 1 से 2 साल का अतिरिक्त स्टे-बैक दिला सकता है, जो पीआर (PR) पाने में बहुत मददगार होता है.
क्या मुझे वर्क वीजा के लिए दोबारा इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट (IELTS/PTE) देना होगा?
हां, वर्क वीजा आवेदन के समय इंग्लिश स्कोर वैध होना चाहिए. नए नियमों के तहत, स्कोर की वैधता अवधि को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया गया है.. यानी आपका टेस्ट रिजल्ट आवेदन की तारीख से एक साल के अंदर का होना चाहिए. साथ ही, जरूरी स्कोर (IELTS 6.5 या समकक्ष) भी पहले से अधिक हो गया है.
क्या मैं वर्क वीजा पर रहते हुए अपनी कंपनी बदल सकता हूं?
सबक्लास 485 वीजा की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह किसी खास नियोक्ता (Employer) से बंधा नहीं होता, आप अपनी पसंद की किसी भी कंपनी में काम कर सकते हैं और जब चाहें नौकरी बदल सकते हैं. इसमें आपको पूर्णकालिक (Full-time) काम करने की पूरी आजादी मिलती है.





