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France Consulate In Greenland: फ्रांस ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अपना पहला वाणिज्य दूतावास खोलकर अमेरिका और ट्रंप की मंशा को कड़ी चुनौती दी है. खनिज संसाधनों और रणनीतिक बढ़त के लिए फ्रांस अब वहां वैज्ञानिक व व्यापारिक मिशन चलाएगा. नाटो की बढ़ती सैन्य हलचल के बीच फ्रांस ऐसा करने वाला पहला ईयू देश बन गया है.

फ्रांस ने ग्रीनलैंड में खोला वाणिज्य दूतावास. (AI Image)
नूक: दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर ग्लोबल पावर पॉलिटिक्स गरमा गई है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बर्फीले क्षेत्र को हासिल करने का सपना देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ फ्रांस ने वहां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है. फ्रांस ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अपना वाणिज्य दूतावास (कांसुलेट) खोल दिया है. इसी के साथ फ्रांस ऐसा पहला यूरोपीय संघ (ईयू) देश बन गया है, जिसने इस स्वायत्त डेनिश क्षेत्र में अपना राजनयिक मिशन स्थापित किया है. फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है. फ्रांस के इस कदम को एक बड़े ‘राजनीतिक संकेत’ के रूप में देखा जा रहा है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जून 2025 में अपनी ग्रीनलैंड यात्रा के दौरान ही इसकी योजना बना ली थी. अब जां-नोएल पोइरियर ने नूक में कांसुल जनरल के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. पोइरियर एक अनुभवी राजनयिक हैं और वियतनाम में फ्रांस के राजदूत रह चुके हैं. उनकी नियुक्ति यह साफ करती है कि फ्रांस इस क्षेत्र को कितनी गंभीरता से ले रहा है.
क्यों ग्रीनलैंड को लेकर मची है दुनिया में होड़?
क्या ट्रंप के ‘कब्जे’ वाले प्लान को मिलेगी चुनौती?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार ग्रीनलैंड को खरीदने या हासिल करने की इच्छा जताई है. हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रशासन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन ट्रंप के बयानों ने पूरे यूरोप को चौकन्ना कर दिया है. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने हाल ही में कहा था कि वॉशिंगटन की इसे कब्जाने की मंशा अब भी बनी हुई है. ऐसे में फ्रांस का वहां अपना मिशन खोलना ईयू की ओर से एक मजबूत संदेश है कि ग्रीनलैंड केवल अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र में नहीं रहेगा. कनाडा भी अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है और वहां नया दूतावास खोल रहा है.
क्या आर्कटिक में शुरू होने वाला है सैन्य तनाव?
ग्रीनलैंड में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. नाटो (NATO) ने ‘आर्कटिक सेंट्री’ नाम से एक नया मिशन शुरू करने की योजना बनाई है. इसका मुख्य उद्देश्य उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में निगरानी और सतर्कता बढ़ाना है. असल में अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर एक तरह का आंतरिक तनाव भी है. नाटो चाहता है कि आर्कटिक क्षेत्र में उसकी स्थिति इतनी मजबूत रहे कि कोई भी महाशक्ति अकेले यहां मनमानी न कर सके. फ्रांस की एंट्री ने इस पूरे समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें
February 06, 2026, 22:04 IST





