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Global aids cut effect| lancet study on children death| children death by 2030 lancet| lancet latest study on disease| वैश्विक मदद में कटौती से 2030 तक 93 देशों में मौतों का खतरा

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Lancet warns of major threat to Children: वैश्विक मदद में कटौती ने अब छोटे बच्चों के लिए खतरा बनने जा रही है. लैंसेट में छपी एक स्टडी में साफतौर पर चेतावनी दी गई है कि वैश्विक सहायता में तीव्र गिरावट से भारत सहित 93 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में 2030 तक 2.26 करोड़ अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. जिनमें पांच वर्ष से कम उम्र के 54 लाख बच्चे शामिल हैं.

द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ ने आज बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (ISGlobal) द्वारा द रॉकफेल फाउंडेशन के ल‍िए क‍िए गए एक अध्ययन में चेतावनी दी है कि उप-सहारा अफ्रीका जहां अध्ययन में शामिल 93 में से 38 देश हैं, विशेष रूप से खतरे में हैं. इसके साथ ही एशिया में भारत सहित 21 देश, लैटिन अमेरिका के 12, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 12 और यूरोप के 10 देश (यूक्रेन सहित) भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं.

अध्ययन में यह भी सामने आया कि 2002 से 2021 के बीच आधिकारिक विकास सहायता (ODA) ने बाल मृत्यु दर में 39 फीसदी की कमी लाने, HIV/AIDS से होने वाली मौतों में 70 फीसदी की कमी करने और मलेरिया व पोषण-सम्बंधी कमियों से होने वाली मौतों में 56 फीसदी की कमी करने में मदद की थी. इसके अलावा इन 93 देशों में जहां विश्व की 75 प्रतिशत आबादी रहती है, इसमें कई अन्य वैश्विक स्वास्थ्य परिणामों में भी सुधार हुआ है. हालांकि अब इस मदद के कम होने से गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो गई है.

रिसर्च बताती है कि वार्षिक 10.6 फीसदी की कमी (जो 2024–2025 के पिछले दो वर्षों की औसत कमी के अनुरूप है) के परिणामस्वरूप 94 लाख रोकी जा सकने वाली मौतें हो सकती हैं, जिनमें पांच वर्ष से कम आयु के 25 लाख बच्चे शामिल हैं.

2024 से 2025 के बीच 32 अरब डॉलर (15.1%) की ODA कटौती के आधार पर, अगर यह कटौती दशक के अंत तक जारी रहती और बढ़ती है, तो इससे पांच वर्ष से कम आयु के 54 लाख बच्चों सहित सभी आयु वर्गों में कुल 2.26 करोड़ अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं जो ग्रेटर बार्सिलोना, पेरिस और लंदन की संयुक्त जनसंख्या के बराबर हो सकती है. यानि मेक्सिको सिटी, ढाका, साओ पाउलो, काहिरा और मुंबई की व्यक्तिगत जनसंख्या से अधिक हो सकती है. या कहें कि 2030 तक अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य की पूरी आबादी के बराबर हो सकती है.

द रॉकफेलर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राजीव जे शाह ने विदेशी सहायता में कटौती की मानवीय लागत पर अपने बयान में कहा, ‘आज मानवता के सामने प्रश्न यह है कि क्या हम भूखों को भोजन देने, बीमारों का इलाज करने और सबसे अधिक असुरक्षित लोगों को उठाने की अपनी प्रतिबद्धताओं से वैश्विक स्तर पर पीछे हटना स्वीकार करेंगे या फिर हम मिलकर ऐसे नए सहयोग मॉडल बनाएंगे जो उन करोड़ों लोगों के लायक हों, जिनकी जानें हमारे ऐसा न करने पर जा सकती हैं.’

इन देशों ने की कटौती
2024 में छह वर्षों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सहायता में गिरावट आई है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जर्मनी ने लगभग 30 वर्षों में पहली बार अपने ODA योगदानों में उल्लेखनीय कटौती की है. 2025 और 2026 के लिए अनुमानित कटौतियों के साथ मिलकर, इन गहरी कटौतियों ने यह समझने की आवश्यकता को जन्म दिया कि दुनिया भर के समुदायों पर इसका मानवीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.

मदद के क्या रहे परिणाम
. कुल मृत्यु दर में 23% की कमी
. बाल मृत्यु दर में 39% की कमी
. HIV/AIDS से होने वाली मौतों में 70 फीसदी, पोषण-सम्बंधी कमियों से 56%, मलेरिया से 56%, डायरिया रोगों से 55% और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों से 54% की कमी देखी गई.
. स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना और रोग नियंत्रण एवं उन्मूलन प्रयासों का समर्थन
. प्रकोपों और महामारियों के लिए तैयारी क्षमता में सुधार हुआ

यह अध्ययन यह भी चेतावनी देता है कि दुनिया के हर चार में से कम से कम तीन लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहां दो दशकों की विकास प्रगति उलट सकती है, रोगों के खिलाफ हासिल प्रगति समाप्त हो सकती है और रोकी जा सकने वाली जानों का नुकसान हो सकता है.

एशिया में इन देशों पर खतरा
अफगानिस्तान, अजरबैजान, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान, लाओस, मलेशिया, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, फिलिपींस, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, थाईलैंड, उज्बेकिस्तान और वियतनाम.

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