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US Canada Tension News: Canada Slams US Over Secret Meetings With Alberta Independence Group- कनाडा के अलगाववादी नेताओं के साथ अमेरिकी अधिकारी मीटिंग कर रहे हैं

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Canada Alberta: अमेरिका के अधिकारियों ने कनाडा के अल्बर्टा के अलगाववादी संगठन से गुप्त बैठकें की हैं. इस खबर के आने के बाद कनाडा में नाराजगी बढ़ गई है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका को कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए. अल्बर्टा को अलग देश बनाने की मांग पहले से मौजूद है.

कनाडा के दुश्मनों से मिला अमेरिका, तेल के लिए क्या देश तोड़ देंगे ट्रंप?अमेरिका ने अल्बर्टा के नेताओं से मीटिंग की है.

कनाडा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार एक ऐसा काम कर दिया है, जो अब असल मायनों में कनाडा को भड़का सकता है. कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में उस वक्त नया तनाव दिखा, जब खबर सामने आई कि अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने कनाडा के एक अलगाववादी संगठन के साथ गुप्त बैठकें की हैं. इस संगठन का मकसद कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा को अलग देश बनाना है. इस पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उन्हें अमेरिका से कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने की उम्मीद है.

अमेरिका की ओर से इस तरह की मीटिंग दिखाती है कि वह तेल के लिए कुछ भी कर सकता है. मार्क कार्नी ने यह बयान अल्बर्टा की प्रीमियर डैनिएल स्मिथ के साथ मीडिया से बातचीत के दौरान दिया. उन्होंने साफ कहा कि वह इस मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हमेशा स्पष्ट बात करते हैं और आगे भी करेंगे.

क्या है पूरा मामला?

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अल्बर्टा प्रोसपेरिटी प्रोजेक्ट (APP) नाम का एक संगठन अल्बर्टा को कनाडा से अलग देश बनाने के लिए जनमत संग्रह की तैयारी कर रहा है. ये संगठन पेटीशन पर हस्ताक्षर करवा रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संगठन के नेताओं ने अप्रैल 2025 के बाद से वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से कम से कम तीन बार मुलाकात की है. इतना ही नहीं, यह समूह अगले महीने एक और बैठक की कोशिश में है, जिसमें वह 500 अरब डॉलर की क्रेडिट सुविधा का प्रस्ताव रखने वाला है. दावा है कि अगर अल्बर्टा की आजादी को लेकर जनमत संग्रह पास होता है, तो यह पैसा नए देश को खड़ा करने में मदद करेगा.

अमेरिका ने क्या सफाई दी?

इस खुलासे के बाद अमेरिका के विदेश मंत्रालय और व्हाइट हाउस दोनों ने मामले को हल्का बताने की कोशिश की. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका नियमित रूप से सिविल सोसाइटी समूहों से मिलता है और इन बैठकों में किसी तरह का कोई वादा नहीं किया गया. हालांकि, विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अल्बर्टा की अलगाव की मांग को लेकर नरम रुख दिखाया. उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि अल्बर्टा अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार हो सकता है और वहां के लोग बेहद स्वतंत्र सोच रखते हैं.

कनाडा में गुस्सा क्यों है?

इन बैठकों की खबर सामने आते ही कनाडा में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने इसे सीधे तौर पर देश तोड़ने की साजिश करार दिया और इसे देशद्रोह जैसा कदम बताया. असल में, अल्बर्टा में केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी लंबे समय से है. पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर आरोप लगाया जाता रहा कि उसने पर्यावरण नीतियों के नाम पर तेल उद्योग को नुकसान पहुंचाया और कई अहम परियोजनाएं रोकीं. अल्बर्टा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल और गैस पर टिका है. एक हालिया सर्वे के मुताबिक, अल्बर्टा के करीब 30 प्रतिशत लोग अलगाव की प्रक्रिया शुरू करने के पक्ष में हैं. हालांकि, कई कनाडाई नेता मानते हैं कि बहुमत अब भी एकजुट कनाडा चाहता है. मार्क कार्नी ने हाल ही में अल्बर्टा के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे प्रशांत महासागर तक तेल पाइपलाइन का रास्ता खुल सकता है.

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Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें

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