मॉस्को: ट्रंप, रूस पर जितना दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं पुतिन उतने ही खूंखार बनते जा रहे हैं. हाल ही में पुतिन ने खुलेआम यूक्रेन के दो शहरों पर कब्जे का ऐलान कर दिया. उन्होंने यूक्रेनी सैनिकों को चेतावनी भेजकर बताया है कि किस तरह उन्हें मौत ने घेर लिया है और अब घुटने टेकना ही आखिरी रास्ता बचा है. उन्होंने साफ कह दिया है कि ‘बचने की अब कोई उम्मीद नही है’.
नहीं छोड़ा बचने का कोई रास्ता
दरअसल, रूस ने बुधवार को ऐलान किया है कि यूक्रेन के दो शहर पोक्रोव्स्क और कुपियांस्क तबाह हो चुके हैं और इस शहर के मलबे में जितने यूक्रेनी सैनिक छुपे हैं, उनके लिए बचने का कोई रास्ता नहीं है. पुतिन की सेना ने बताया है कि यूक्रेनी सैनिकों को घेर लिया गया है और अब उनके पास सरेंडर की एक मात्र ऑप्शन बाकी रहा है.
पोक्रोव्स्क पर रूस का कब्जा एक खतरनाक प्लानिंग की सफलाता है. असल में पुतिन का टारगेट डोनबास है, जिसे हथियाने के लिए वो 2024 से जी-जान से जुटे हैं. पोक्रोव्स्क पर कब्जे के बाद अब इस इलाके को पूरी तरह से हथियाने के लिए दरवाजा खुल गया है. डोनबास क्षेत्र के लगभग 10%, यानी 5,000 वर्ग किलोमीटर (1,930 वर्ग मील) क्षेत्र पर अभी भी यूक्रेनी सेनाओं का नियंत्रण है.
क्या है युद्ध की ‘पिनसर मूवमेंट्स’ रणनीति?
पोक्रोव्स्क और कुपियांस्क पर कब्जे के लिए पुतिन ने युद्ध नीति की बेहद शातिर टेक्निक का इस्तेमाल किया है. जहां एक तरफ वो बाकी हमले सामने से कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन के इन दो शहरों पर कब्जा करने के लिए रूस ने ‘पिनसर मूवमेंट्स’ रणनीति का इस्तेमाल किया है. इसमें सेना के दो हिस्से दुश्मन को दो तरफ से घरते हैं और फिर आक्रमण करते हैं.
इसके अलावा पुतिन ने एक और चाल चली, जिसमें उन्होंने सोमवार को दुनिया के सामने कहा था कि कुपियांस्क में रूस के सिर्फ 60 सैनिक ही रह गए हैं, जिन्हें यूक्रेनी सेना क्लियर करने की कोशिश कर रही है. भ्रम की स्थित पैदा करके रूसी सेना ने दोनों तरफ से यूक्रेन के दो शहरों को घेरा और कब्जा कर लिया.





