मॉस्को: कुछ महीने पहले जियो पॉलिटिक्स में एक बड़ी हलचल पैदा हुई थी, जब 3 सुपर पावर्स भारत, रूस और चीन ने सिर उठाया था. तीन ताकतवर देशों को एक साथ देखकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी हिल गए थे. ये सब हुआ था एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान और इसके पीछे रूसी राष्ट्रपति पुतिन का ‘चाणक्य दिमाग’ था. सम्मेलन में पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाथों में हाथ डाले नई दोस्ती का सबूत देते नजर आए थे. तीनों देशों के बीच ट्रेड से लेकर सैन्य डील तक कई वादे-इरादे हुए थे लेकिन साल खत्म होते-होते हालात किसी और दिशा में जाते दिख रहे हैं.
भारत, चीन और रूस के बीच सुहाने वादे
पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की दोस्ती देखते हुए एक्सपर्ट्स ने कयास लगाने शुरू कर दिए थे कि किस तरह ये 3 सुपर पावर्स जियो पॉलिटिक्स का नक्शा बदलकर रख देंगी. डी-डॉलराइजेशन से लेकर ग्लोबल ट्रेड की बदलती सूरत तक को लेकर बात होने लगी थी, कुछ हद तक इस पर काम भी शुरू हो गया था. हालांकि, साल के आखिरी दिनों में तीनों के बीच तनाव की स्थित पैदा होती दिख रही है.
चीन ने बिगाड़े रिश्ते
अमेरिका की चाल
रूस-चीन की मिली-भगत से भारत को नुकसान
इसके अलावा हाल ही में ताजिकिस्तान में बंद हुए भारतीय एयरबेस को लेकर भी एक चौंकाने वाला दावा किया जा रहा है. भारत और ताजिकिस्तान के बीच हुए समझौते की लीज अवधि 2022 में खत्म हो गई थी, जिसे आगे बढ़ाने से मना कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे रूस और चीन का दबाव है क्योंकि दोनों देश नहीं चाहते हैं कि ताजिकिस्तान पर ‘गैर-क्षेत्रीय सैन्य उपस्थिति’ हो. भारत के खाली करते ही रूसी सेनाओं ने इस बेस पर कंट्रोल कर लिया है.
भारत के लिए क्यों है बड़ा झटका?
अभी भी बाकी है उम्मीद
चीन से पहले ही मिले धोखे के बाद अब आयनी एयरबेस वाले कांड ने 3 सुपर पावर्स के बीच हालात बिगड़ दिए हैं. हालांकि, अभी भी तीनों देशों के बीच बात पूरी तरह उखड़ी नहीं है. हाल ही में चीन ने रेयर अर्थ इम्पोर्ट को लेकर भारतीय कंपनियों को लाइसेंस दिया है. इसके अलावा भारत और रूस के बीच सैन्य डील अभी भी जारी है.





