विदेश » Rajnath Singh Malaysia Visit ASEAN China Strategy | भारत का दम दिखाने मलेशिया पहुंचे राजनाथ सिंह, आसियान रक्षा मंच पर ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से चीन को देंगे करारा जवाब

Rajnath Singh Malaysia Visit ASEAN China Strategy | भारत का दम दिखाने मलेशिया पहुंचे राजनाथ सिंह, आसियान रक्षा मंच पर ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से चीन को देंगे करारा जवाब

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कुआला लंपुर/नई दिल्ली: भारत की रक्षा नीति अब इंडो-पैसिफिक पर भी फोकस कर रही है. इसी रणनीति के तहत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को मलेशिया पहुंचे हैं, जहां वे अगले दो दिनों तक कई देशों के रक्षा मंत्रियों से मुलाकात करेंगे. ये दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को और तेज़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. राजनाथ सिंह शुक्रवार को दूसरी आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में शामिल होंगे, जो मलेशिया की अध्यक्षता में हो रही है. इस बैठक का मकसद भारत और आसियान देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देना है. इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को वे 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में हिस्सा लेंगे.

इस मंच पर राजनाथ सिंह भारत की रणनीतिक दृष्टि और आसियान देशों के साथ मिलकर सुरक्षा, रक्षा तकनीक और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर चर्चा करेंगे. मंत्रालय के मुताबिक, भारत यहां अपने अनुभव और विजन साझा करेगा कि कैसे क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सकता है.

ASEAN क्या है?

आसियान मंच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा संवाद और सहयोग का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है. इसमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर लेस्ते और वियतनाम शामिल हैं. इनके अलावा भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे आठ बड़े साझेदार देश भी इसका हिस्सा हैं.

भारत इस मंच पर अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है. मौजूदा चक्र (2024–2027) में भारत मलेशिया के साथ मिलकर ‘काउंटर टेररिज्म’ विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है. इसके साथ ही आसियान-भारत समुद्री अभ्यास का दूसरा संस्करण 2026 में आयोजित किया जाएगा, जो भारत की समुद्री शक्ति और कूटनीतिक प्रभाव दोनों को बढ़ाएगा.

राजनाथ सिंह का यह दौरा भारत की विदेश नीति के उस नए दौर की झलक है, जहां भारत सिर्फ प्रतिक्रियाशील नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभा रहा है. आसियान मंच पर भारत की यह उपस्थिति चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और हिंद-प्रशांत में शक्ति संतुलन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

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