पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाला नूर वली महसूद है कौन? पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने नूर वली महसूद को मारने के लिए ही काबुल पर हमला किया था लेकिन पहले नूर वली महसूद ने ऑडियो जारी किया और फिर वीडियो में ही सामने आ गया. TTP के सरगना ने साबित कर दिया कि वो अभी भी जिंदा है और सीधा पाकिस्तान को चुनौती दे दी.
तालिब यानी जो शिक्षा लेता हो और तालिब का बहुवचन होता है तालिबान. ये छात्र इसलिए कहे जाते हैं क्योंकि ये गुट पाकिस्तान ने अपने बॉर्डर के इलाकों के मदरसों के छात्रों को अफगानिस्तकान में जिहाद करने के लिए तैयार किया था. इन लड़ाकों को पाकिस्तान एक खतरनाक आतंकवादी संगठन मानता है, जो पाकिस्तान की सरकार, सेना, पुलिस और आम लोगों के खिलाफ भी लगातार हमले करता रहता है.
कौन है नूर वली?
इनका सरगना है नूर वली महसूद, जो पाकिस्तान के लिए एक आतंकवादी है. एक तरह से मान लीजिये कि नूर वली महसूद एक ऐसा पाकिस्तानी उग्रवादी नेता है, जो हिंसा और जंग के रास्ते पाकिस्तान में शरिया हुकूमत लागू करने का मकसद लिए लड़ रहे TTP का सरगना है. शुरू से ये सरगना नहीं था. बैतुल्लाह महसूद ने 2007 में TTP बनाया था. ये नाम असल में महसूद कबीले का नाम है. पश्तूनों यानी पठानों का एक कबीला है वहां पाकिस्तान अफगानिस्तान के बॉर्डर के इलाके में दक्षिणी वजीरिस्तान में जिसको महसूद कहते हैं. ये कबीले उन इलाकों में एक तरह से अपना ही राज चलाते हैं. पाकिस्तान के इस इलाके को पहले FATA कहते थे, यानी फेडरली मिंस्टर्ड ट्राइबल एरियाज़. अंग्रेजों के जमाने से ये ऐसा इलाका रहा जहां कबीलों की ही चलती है सरकार की नहीं.
किसी विदेशी के काबू में नहीं आए ये लड़ाके
महसूद कबीले के बैतुल्लाह महसूद ने पाकिस्तान तालिबान ही बना दिया. महसूद कबीला खासकर दक्षिण वज़ीरिस्तान में सदियों से बसा हुआ है. ब्रिटिश राज के जमाने में भी महसूद क़बीले के लोग कभी अंग्रेज़ों के क़ाबू में भी नहीं आए थे. वो हथियार उठाकर लड़े, कभी किसी विदेशी शासक के काबू में नहीं आए. ये लोग हनफी संप्रदाय के सुन्नी मुसलमान हैं और सारे फैसले कबीले के हिसाब से ही होते हैं इनके यहां.
जब अमेरिका ने 9/11 हमलों के बाद अफग़ानिस्तान पर हमला किया, तो अल-कायदा और तालिबान के बचे-खुचे लड़ाके इस बॉर्डर वाले इलाके में भाग आए और छिप गए. महसूद कबीले के कई युवा, जो गरीबी और बेरोजगारी से तंग थे वो भी इनके साथ जुड़ गए और ट्रेनिंग ली और हथियार उठा लिए. फिर 2007 में इन्होंने टीटीपी बना दिया और उसमें महसूद कबीले के लड़ाके सबसे आगे रहे.
ये क्षेत्र आज भी गरीब है, स्कूल-कॉलेज बहुत कम हैं, लड़के किताबों के बजाय हथियार चलाना पहले सीखते हैं . पहले तो TTP को पाकिस्तान ने उतना सीरियसली नहीं लिया लेकिन जब ये पाकिस्तान पर ही हमले करने लग गए तो पाकिस्तान ने इनपर अमेरिका के साथ ड्रोन हमले किया. बैतुल्लाह महसूद को जब उन्होंने मार गिराया तो उनको लगा कि ये खत्म हो जाएंगे लेकिन फिर मौलाना फज्लुल्लाह और 2018 से नूर वली महसूद ने इनको दोबारा खड़ा कर दिया.
नूर वली महसूद इन सबके के बीच काफी पढ़ा लिखा माना जाता है. उसने इस्लाम पर और इस्लामी शासन पर दर्जनों किताबें लिख रखी हैं. नूर वली महसूद की अगुवाई में TTP ने पाकिस्तान की सेना को घुटनों पर ला दिया है. नूर वली को सेना पकड़ ही नहीं पा रही. TTP पाकिस्तान सरकार को काफ़िरों की सरकार कहता है. सेना को अपना दुश्मन मानता है, और उसका मानना है कि वो पाकिस्तान में शरिया क़ानून वाली हुकूमत लाने के लिए जिहाद लड़ रहा है. और ये जो पूरा फोकस दिया है नए सिरे से पाकिस्तान के तालिबान को वो माना जाता है कि नूर वली महसूद ने ही दिया है.
नूर वली महसूद 47 साल का है और कहते हैं कि बचपन से ही नूर वली को धार्मिक पढ़ाई का शौक था लेकिन नूर वली की पढ़ाई बीच में छूट गई थी जब वो अफगानिस्तान चला गया था. यहां पर कंट्रोल करने के लिए नूर वली ने मजार-ए-शरीफ़ की 1997 की लड़ाई और काबुल के पास की जंगों में तब हिस्सा लिया. उसके पिता ने सलाह दी कि पढ़ाई पूरी कर लो, तो वो वापस पाकिस्तान लौट आया. उसने 1999 में अपनी धार्मिक पढ़ाई खत्म की और मुफ्ती बन गया. 1990 के दशक में ही उसने फैसलाबाद, गुजरांवाला और कराची के कई मदरसों कुरआन पढ़ा.
9/11 के दौर और 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया तो 2003 में वो महसूद तालिबान नाम के एक जिहादी गुट में शामिल हो गया. ये गुट दक्षिण वजीरिस्तान में पैदा हुआ था. फिर 2007 में जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान बना, तो ये गुट भी उसमें मिल गया. बैतुल्लाह महसूद टीटीपी का पहला सरगना बना, नूर वली बैतुल्लाह का डिप्टी रहा और टीटीपी की शरिया अदालत काजी था.
प्रधानमंत्री की हत्या का कलंक
इसके बाद 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या की भी टीटीपी ने जिम्मेदारी ली थी और नूर वली ने अपनी किताब में इसका जिक्र किया कि ये हत्या अमेरिका और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ थी. TTP के पहले तीन सरगना – बैतुल्लाह, हकीमुल्लाह और फज़्लूल्लाह, सब ड्रोन या हमलों में मारे गए. नूर वली इन सबसे विद्वान माना जाता है. उसने 2018 में कमान संभाली. 2021 में जब अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो टीटीपी को नई ताकत मिली. सीमा पार आना-जाना आसान हो गया, हथियार मिलने लगे और TTP ने पाकिस्तान पर हमले और तेज कर दिये.





