बिग बैंग के 10 करोड़ साल बाद बना ऑब्जेक्ट?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर कैपोटाउरो सच में एक आकाशगंगा है, तो यह बिग बैंग के सिर्फ 100 मिलियन (10 करोड़) साल बाद बनी होगी. यानी यह अब तक की सबसे पुरानी और शुरुआती आकाशगंगा हो सकती है.
लेकिन अगर यह गैलेक्सी नहीं है, तो ये हमारी मिल्की वे के किनारों पर मौजूद एक ‘फेल हुआ तारा’ यानी ब्राउन ड्वार्फ हो सकता है, जो किसी ग्रह से बड़ा है, लेकिन उसमें वह ताकत नहीं है जो असली तारों में होती है, जिससे वे चमकते हैं.
इटली के वैज्ञानिकों की टीम ने किया अवलोकन
इटली के खगोलशास्त्री जियोवानी गांडोल्फी और उनकी टीम ने इसे पहली बार देखा था. वे जेम्स वेब टेलिस्कोप के डेटा से बहुत पुरानी आकाशगंगाओं की तलाश कर रहे थे. तभी कैपोटाउरो उनकी नजर में आया.
लेकिन उस वक्त डेटा बहुत सीमित था, इसलिए यह तय नहीं हो पाया कि यह वस्तु आकाशगंगा है या कोई तारा. गांडोल्फी ने इसे मजेदार अंदाज में समझाया, ‘ये वैसा ही था जैसे किसी अपराध स्थल पर डीएनए का छोटा टुकड़ा मिल जाए, लेकिन उससे यह न पता चले कि अपराधी कौन है.‘
मार्च में आया नया डेटा, खुलने लगी परतें
मार्च 2025 में JWST ने इस रहस्यमयी ऑब्जेक्ट पर और डेटा जारी किया. अब वैज्ञानिकों के पास थोड़ी और जानकारी आई, जैसे किसी केस में अधूरी फिंगरप्रिंट मिल जाए. इस डेटा से टीम को यह समझने में मदद मिली कि कैपोटाउरो आखिर कितना पुराना है और उसका तापमान कितना है.
नतीजा क्या निकला?
रिसर्च अब तक निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है. लेकिन दो संभावनाएं सबसे ज्यादा मजबूत लग रही हैं– अगर ये शुरुआती आकाशगंगा है, तो यह बिग बैंग के 10 करोड़ साल बाद बनी होगी. यानी अब तक की सबसे पुरानी आकाशगंगा. इसका आकार भी बहुत विशाल बताया गया है– एक अरब सूर्यों के बराबर द्रव्यमान वाली.
अगर ये ब्राउन ड्वार्फ है, तो ये हमारी मिल्की वे के बाहरी हिस्से में मौजूद सबसे ठंडा और सबसे दूर ‘फेल हुआ तारा’ होगा. इसका तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस है– यानी किसी गर्म दिन जितना!
वैज्ञानिक भी हैरान
रिसर्च टीम के सदस्य गांडोल्फी का कहना है कि, “कैपोटाउरो चाहे जो भी निकले, ये बहुत रोमांचक खोज है. इससे हमें हमारी आकाशगंगा और पूरे ब्रह्मांड की समझ को नए नजरिए से देखने का मौका मिलेगा.” संयुक्त अरब अमीरात यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री मुहम्मद लतीफ, जो इस शोध का हिस्सा नहीं थे, ने कहा, “ये अब तक जेम्स वेब टेलिस्कोप की सबसे रहस्यमयी खोजों में से एक है. ये ऑब्जेक्ट हमारी समझ की सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है.”





