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सीएम चंद्रबाबू नायडू अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर गए, इसे शांति का प्रतीक बताया

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चंद्रबाबू नायडू ने अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर में दर्शन किए, इसे वैश्विक विरासत बताया. केमी बैडेनोक ने लंदन मंदिर में दीपावली मनाई, बीएपीएस की एकता और शांति की सराहना की.

सीएम चंद्रबाबू नायडू अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर गए और दर्शन किएअबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और ब्रह्मविहारीदास स्वामी .

नई दिल्‍ली. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर गए और भगवान स्‍वामी नारायन के दर्शन किए. मंदिर भ्रमण के बाद इसे शांति का वैश्विक विरासत और सच्चा चमत्कार बताया. उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन के सबसे असाधारण अनुभवों में से एक कहा. मंदिर में ब्रह्मविहारीदास स्वामी ने उनका स्वागत किया और मंदिर की शिल्पकला, आधुनिक तकनीक रूबरू कराया और एकता के संदेश को दर्शाने वाले परिसर का भ्रमण कराया.

चन्‍द्रबाबू नायडू ने मंदिर में तकनीक और पारंपरिक मूल्यों के समन्वय की प्रशंसा की, जो युवाओं के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने पवित्र देवताओं के समक्ष प्रार्थना की और प्रमुख स्वामी महाराज के दृष्टिकोण को सराहा, जिनकी दूरदर्शिता से यह मंदिर निर्माण संभव हो पाया. नायडू ने यूएई नेतृत्व और भारत के प्रधानमंत्री के समर्थन को भी श्रेय दिया, इसे “इतिहास, धर्म और क्षेत्र से परे मानवता को जोड़ने वाली वैश्विक विरासत” बताया.

ब्रिटेन की विपक्षी नेता दिवाली मनाने मंदिर पहुंची

दूसरी ओर, ब्रिटेन की विपक्षी नेता और कंजरवेटिव पार्टी की प्रमुख केमी बैडेनोक ने 22 अक्टूबर 2025 को लंदन के बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर (नेस्डन टेम्पल) में दीपावली और हिंदू नववर्ष के उत्सव में भाग लिया. वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने उनका स्वागत किया. उन्होंने मंदिर की आध्यात्मिकता, कलात्मक पत्थर-कला और अन्नकूट के दर्शन किए, जिसमें सैकड़ों शाकाहारी व्यंजन भगवान को अर्पित किए गए.

बैडेनोक ने पेरिस के बीएपीएस मंदिर के 2026 में होने वाले उद्घाटन से प्रेरित एक प्रदर्शनी भी देखी, जो सेन नदी और पेरिस के ऐतिहासिक स्थलों को दर्शाती थी. यह प्रदर्शनी बीएपीएस की शांति, एकता और अंतर-सांस्कृतिक सद्भावना को बढ़ावा देने की भूमिका को रेखांकित करती है. बीएपीएस मंदिरों के वैश्विक महत्व को दर्शाती हैं, जो संस्कृति, आध्यात्मिकता और एकता का प्रतीक हैं. ये मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि विश्व स्तर पर शांति और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने वाले केंद्र भी है.

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