विदेश » 3000 Year Old Secret Found In Egypt’s Karnak Temple In Latest Geoarchaeological Discovery | 3000 साल पुराना रहस्य उजागर – करनक मंदिर की जमीन के नीचे मिली मिस्र की “पहली धरती” की कहानी

3000 Year Old Secret Found In Egypt’s Karnak Temple In Latest Geoarchaeological Discovery | 3000 साल पुराना रहस्य उजागर – करनक मंदिर की जमीन के नीचे मिली मिस्र की “पहली धरती” की कहानी

Facebook
Twitter
WhatsApp

Last Updated:

मिस्र के कर्णक मंदिर पर नई स्टडी ने खुलासा किया कि यह इलाका 3,000 साल पहले नील नदी के बीच एक टापू था. यहीं से मिस्रवासी ‘पहली धरती’ और सूर्य देव रा की उत्पत्ति मानते थे.

3000 साल पुराना खजाना… मिस्र के कर्णक मंदिर की जमीन के नीचे यह क्या दबा मिला!मिस्र का कर्णक मंदिर (File Photo : Reuters)

काहिरा: मिस्र में लक्सर के पास स्थित कर्णक (कर्नाक) मंदिर को दुनिया के सबसे विशाल और रहस्यमयी मंदिर परिसरों में गिना जाता है. इसके नीचे 3,000 साल पुरानी एक ऐसी कहानी छिपी थी जिसने मिस्र के इतिहास की धारणाएं बदल दी हैं. स्वीडन की Uppsala University के डॉ. एंगस ग्राहम और University of Southampton के डॉ. बेन पेनिंगटन की टीम ने 61 सिडिमेंट कोर और हजारों मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों का एनालिसिस किया. कर्णक मंदिर का शुरुआती अस्तित्व पुराने साम्राज्य काल (2591-2152 ईसा पूर्व) में पाया गया. 6 अक्टूबर को Antiquity जर्नल में छपी नई जियोआर्कियोलॉजिकल स्टडी ने कर्णक मंदिर की असली उम्र, उसकी भौगोलिक उत्पत्ति और धार्मिक प्रतीकों से उसके जुड़ाव को नए तरीके से समझाया है.

नदी के बीच एक ‘पवित्र टापू’ से शुरू हुई थी कहानी

रिसर्च से पता चला कि उस समय कर्णक का इलाका नील नदी की धाराओं के बीच एक नदी-स्पर्शी टापू था, जो बस्ती के लिए अनुपयुक्त था. लेकिन लगभग 2520 ईसा पूर्व में जब नदी की दिशा बदली, तब एक छोटा सा ऊंचा भूभाग बना. जिसे मिस्रवासी ‘प्राइमिवल माउंड’ यानी ‘पहली धरती’ मानते थे.

मिथकों और इंजीनियरिंग का संगम

  • प्राचीन मिस्र की कहानियों में कहा गया है कि सूर्य देवता रा (Ra) या अमुन-रा (Amun-Ra) अराजक जल से उठकर पहली धरती पर अवतरित हुए थे. अब वैज्ञानिक मानते हैं कि कर्णक के संस्थापकों ने जानबूझकर इसी स्थल को इसलिए चुना ताकि यह स्थान पौराणिक ‘सृजन स्थल’ की तरह दिखे, यानी जहां से जीवन और देवत्व दोनों की शुरुआत हुई.
  • जैसे-जैसे सदियां बीतीं, नील नदी के किनारे फैलते गए, टापू बड़ा होता गया और मंदिर परिसर भी परत दर परत ऊपर उठता गया. प्राचीन इंजीनियरों ने रेत भरकर नींव मजबूत की और पुराने चैनलों पर नए पत्थर के हॉल बनाए.
  • इस रिसर्च ने यह भी उजागर किया कि मिस्रवासी सिर्फ देवताओं की पूजा नहीं करते थे. वे अपने भूगोल को धार्मिक प्रतीकों में बदल देते थे. कर्णक इसी सोच का जीता-जागता उदाहरण है. यहां नदी, धरती और देवत्व तीनों एक-दूसरे में घुले हुए हैं.
  • डॉ. ग्राहम के शब्दों में, ‘कर्णक वह जगह है जहां धर्म, प्रकृति और इंजीनियरिंग एक साथ मिलकर सभ्यता का प्रतीक बने.’

अब वैज्ञानिक लक्सर के फ्लडप्लेन में आगे की खुदाई की योजना बना रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि कैसे नील नदी ने मिस्र के धार्मिक दिल – कर्णक और थेब्स – को आकार दिया.

authorimg

Deepak Verma

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He…और पढ़ें

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He… और पढ़ें

homeworld

3000 साल पुराना खजाना… मिस्र के कर्णक मंदिर की जमीन के नीचे यह क्या दबा मिला!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी