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3 साल तक केवल एक सवारी को ढोती रही ट्रेन, रेलवे की इस सेवा की मुरीद हुई दुनिया

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मौजूदा समय ट्रेनों में मारामारी चल रही है, लेकिन एक जगह केवल एक यात्री को लेकर ट्रेन चली. यह क्रम करीब तीन साल तक चला. जानें क्‍या है पूरा मामला?

3 साल तक केवल एक सवारी को ढोती रही ट्रेन, रेलवे की इस सेवा की मुरीद हुई दुनियाछात्रा की गुहार पर रेलवे ने तीन साल तक स्टेशन को खोले रखा.

नई दिल्‍ली. इस समय दिवाली और छठ पूजा की वजह से ट्रेनों में जमकर मारामारी चल रही है. कुछ रूटों पर चलने वाली ट्रेनों मे लोगों को धक्‍का मुक्‍की करके यात्रा करनी पड़ रही है, वेटिंग टिकट तक नहीं मिल रहा है. लेकिन आपसे कहा जाए कि एक जगह केवल एक पैसेंजर के लिए ट्रेन चलानी पड़ी. तो शायद आपको एक बारगी विश्‍वास न हो, लेकिन यह सच है. काफी समय तक इस ट्रेन से केवल एक छात्रा ही सफर करती रही. आइए जानते हैं पूरा मामला क्‍या है?

देशभर 13000 से अधिक ट्रेनें चलती हैं. इसमें शताब्‍दी, राजधानी जैसी प्रीमियत ट्रेनों के अलावा सबअर्बन ट्रेनें भी शामिल हैं. सामान्‍य तौर पर 24 कोच की ट्रेन में 1200 से 1400 यात्री सफर करते हैं, लेकिन फेस्टिवल सीजन में यह संख्‍या और बड़ी जाती है. जनरल और स्‍लीपर कोचों में और हाल खराब हो जाता है.

वहीं, जापान के होक्‍काइडो द्वीप में काफी समय तक एक ही छात्रा के लिए ट्रेन चलानी पड़ी. साल 2016 में इस द्वीप के क्यु-शिराताकी स्टेशन को बंद करने का फैसला लिया गया. पर एक छात्रा काना हराडा स्कूल में पढ़ती थी और वहां जाने का एक ही साधन ट्रेन थी. काना ग्रेजुएट कर रही थी. छात्रा ने ट्रेन ऑपरेशन कंपनी से गुहार लगाई. अगर स्‍टेशन बंद हो जाएगा तो ट्रेन नहीं रुकेगी और बगैर ट्रेन कालेज पहुंचना मुश्किल है. इससे पढ़ाई बंद हो जाएगी. शिक्षा को महत्‍व को देखते हुए तीन साल तक अकेले सफर कराना पड़ा.  तीन साल तक स्‍टेशन को खुला रखा है. ज्‍यादातर समय छात्रा के अलावा दूसरा यात्री नहीं होता था. हर सुबह और शाम ट्रेन एक ही छात्रा को लेकर जाती और वापस छोड़ती.

दरअसल इस द्वीप में लोगों की संख्‍या लगातार कम हो रही थी. आबादी घटकर केवल 36 ही रह गयी थी. इस वजह से ट्रेन चलाने वाली कंपनी ने स्‍टेशन को बंद करने का फैसला लिया. क्‍योंकि यहां पर यात्रियों की संख्‍या न के बराबर थी और स्‍टेशन को खोलने में काफी ज्‍यादा खर्च आ रहा था. इस वजह से ट्रेन चलाने वाली कंपनी ने इसे बंंद करने का फैसला किया.

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