Last Updated:
अमेरिका में मोटेल चला रहे गुजरातियों की हत्या का क्रम जारी है, इसी साल अब तक 7 लोगों की हत्या की जा चुकी है.
अमेरिका में मोटल कारोबार पर गुजरातियों का कब्जा है.अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में हाल ही में एक भारतीय मूल के 51 वर्षीय मोटल मालिक राकेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई. राकेश पर गोली उस समय चली जब वह शोर शराबा सुनकर बाहर पहुंचे थे. इससे ठीक एक सप्ताह पहले उत्तरी कैरालिना के एक मोटल में दो गुजराती कर्मचारियों की हत्या हुई थी. विदेश में पैसे कमाने की चमक में अपना देश छोड़कर गए गुजरातियों के खिलाफ किया गया यह कोई पहला अपराध नहीं है. अगर इसी साल की बात करें तो अब तक सात गुजरातियों की हत्या की जा चुकी है, इसकी वजह मोटेल, गैस स्टेशन या कन्वीनियंस स्टोर से जुड़े अपराध ही रहे. इससे पहले भी मोटेल कारोबार से जुड़े गुजरातियों को निशाना बनाया जाता रहा है.

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. इससे पहले मैंने, अमर उजाला, हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में काम किया है. साथ ही टाइम्स नाउ, जागरण और टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट में राजनीति, इतिहास, शिक्षा, साहित्…और पढ़ें
मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. इससे पहले मैंने, अमर उजाला, हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में काम किया है. साथ ही टाइम्स नाउ, जागरण और टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट में राजनीति, इतिहास, शिक्षा, साहित्… और पढ़ें
October 07, 2025, 14:09 IST
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वह कहते थे कि- ‘अगर तुम पटेल हो तो होटल लीज पर लो’. इसके लिए वह गुजरातियों को लोन भी देते थे, बिना किसी लिखित कागज के.इससे गुजरातियों का रुझान बढ़ा. 1965 में जब इमिग्रेशन एक्ट आसान हुआ तो गुजरात से हजारों लोग अमेरिका पहुंचे. इनमें युगांडा से भागे शरणार्थी भी थे.1990 तक गुजराती अमेरिका के मोटेल बिजनेस पर आधा कब्जा कर चुके थे. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने एक लेख ‘ए पटेल मोटल कार्टेल?’में इस बारे में विस्तार से बताया है.
गुजरातियों ने मोटेल को तरजीह दी, क्योंकि वेजेटेरियन होने की वजह से वह रेस्टोरेंट और होटल से उन्होंने खुद को दूर रखा. यह होटल के मुकाबले सस्ते थे, ज्यादा स्टाफ की जरूरत नहीं थी. इन परिवारों की फैमिली ही कमरों को साफ कर लेती थी. यह खुद चेक इन संभालते थे. लीज पर लिए मोटेल से कमाई करते थे और फिर एक नया मोटेल खरीदेते थे. इसी का असर है कि अमेरिका में गुजरातियों की आबादी तकरीबन 1 प्रतिशत है, लेकिन वह अमेरिका के 60 प्रतिशत मोटेल कारोबार को चलाते हैं.
गुजरातियों ने अमेरिका में ये सफलता यूं ही हासिल नहीं. वे एक गुजराती से लोन लेते हैं, उसे चुकाते नहीं बल्कि दूसरे गुजराती को पे फॉरवर्ड करते हैं, यानी उसे लोन देते हैं. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में जिन गुजरातियों ने काम किया, वहां पैसा कमाया, मगर भारत को नहीं भूले. यहां अपने गांव शहर की सूरत बदलने के लिए लगातार काम किया.
राकेश पटेल : सूरत के रहने वाले 50 साल के राकेश पटेल की 4 अक्टूबर को पेंसिल्वेनिया के एलेघेनी काउंटी के मोटेल में सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
अनिल पटेल और पंकज : गुजरात मूल के रहने वाले दोनों युवकों की नॉर्थ कैरोलिना में मोटेल में गोली मारकर हत्या की गई, इसकी वजह लूटपाट का प्रयास बताया गया.
किरण पटेल: गुजरात के बोरसाद के रहने वाली किरण की पिछले महीने 16 सितंबर को साउथ कैरोलिना में गोली मारकर हत्या की गई, उनके एक स्टोर में चोरी की गई थी.
बाकी तीन हत्याएं भी मोटेल, गैस स्टेशन से जुड़ी हैं. इसके अलावा कर्नाटक मूल के एक व्यक्ति की हत्या भी शामिल है, जिसकी डलास में उसके ही सहकर्मी ने वाशिंग मशीन के झगड़े में हत्या कर दी थी.
मोटेल अक्सर शहर की भीड़ भाड़ से दूर शांत जगहों पर होते हैं. इनमें गेस्ट आते जाते रहते हैं. मोटेल में आकर ऐसे लोग भी ठहरते हैं जो ड्रग्स या अवैध कामों से जुड़े हैं. मेहमान ज्यादा दिन रुका और किराया नहीं दिया तो झगड़ा. कभी लूटपाट के प्रयास में गोली बारी तो कभी ड्रग ओवरडोज के केस. कुछ मोटेल तो पूरे के पूरे परिवार चला रहे हैं, क्योंकि कॉस्ट कटिंग के चक्कर में ये कर्मचारी रखते नहीं. कैमरे खराब हो जाते हैं तो उन्हें सही नहीं कराते, लिहाजा यह मोटेल क्राइम का एक अड्डा बन जाते हैं.
इसके अलावा अमेरिका में कुछ लोग इन लोगों को जॉब चोर भी मानते हैं. खासतौर से छोटे शहरों में दूसरे देशों से आए लोगों से नफरत की खूब बातें सामने आती हैं. एशियन अमेरिका होटल ऑनर्स एसोसिएशन अब इस दिशा में काम क रहा है, कैमरे दुरुस्त किए जा रहे हैं और जो नए लोग इस बिजनेस में आ रहे हैं उन्हें बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है.
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐपया वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें





