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कभी थीं हेवी मेटल ड्रमर अब बनेंगी जापान की पहली महिला पीएम, जानें साने ताकाइची का सफर

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Japan fFrst Female Prime Minister: जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने शनिवार यानी 4 अक्टूबर को साने ताकाइची को अपना नया नेता चुना. जिससे वह अपनी आदर्श पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की तरह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की राह पर आगे बढ़ गईं. 64 वर्षीय कंजर्वेटिव लीडर ताकाइची टोक्यो स्थित एलडीपी मुख्यालय में हुए एक आंतरिक पार्टी मतदान में मध्यमार्गी शिंजिरो कोइज़ुमी को हराकर शीर्ष पर रहीं. 

उम्मीद है कि जापान की संसद का निचला सदन जिसे डाइट के नाम से जाना जाता है अक्टूबर के मध्य में नेतृत्व के लिए होने वाले मतदान में उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुनेगा. ताकाइची निवर्तमान प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा का स्थान लेंगी. इशिबा ने पिछले महीने एलडीपी के भीतर बढ़ते दबाव के बीच इस्तीफा देने की घोषणा की थी. एलडीपी ने संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत खो दिया था. लेकिन कौन हैं साने ताकाइची? उनकी जीत जापान के लिए क्या मायने रखती है? आइए एक नजर डालते हैं.

1993 में बनी थीं पहली बार सांसद
जापानी राजनीति में साने ताकाइची की यात्रा बहुत ज्यादा लंबी नहीं रही है. एक युवा छात्रा के रूप में उन्होंने एक हेवी मेटल बैंड में ड्रम बजाया और मोटर साइकिल चलाई. वह पहली बार 1993 में अपने गृहनगर नारा से जापान की संसद के लिए चुनी गईं. उसके बाद से आर्थिक सुरक्षा, आंतरिक मामलों और लैंगिक समानता मंत्री सहित प्रमुख पार्टी और सरकारी पदों पर प्रभावशाली रहीं. अब, वह सत्तारूढ़ एलडीपी के लिए एक उथल-पुथल भरे दौर में कमान संभाल रही हैं. बढ़ती मुद्रास्फीति, एक विनाशकारी काला धन घोटाले और आव्रजन-विरोधी सैनसेतो पार्टी जैसे कट्टर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वियों के उदय के कारण कंजर्वेटिव पार्टी युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ खोती जा रही है. 

साने ताकाइची सत्तारूढ़ एलडीपी के लिए एक उथल-पुथल भरे दौर में कमान संभाल रही हैं.

हाल के दिनों में, एलडीपी और उसके गठबंधन सहयोगी ने पिछले वर्ष इशिबा के नेतृत्व में दोनों सदनों में अपना बहुमत खो दिया, जिसके कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. दूसरे दौर के मतदान से पहले दिए गए एक भाषण में ताकाइची ने कहा, “हाल ही में मैंने देश भर से तीखी आवाजें सुनी हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि अब हमें समझ नहीं आ रहा कि एलडीपी का क्या मतलब है. इसी भावना ने मुझे प्रेरित किया. मैं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और भविष्य को लेकर चिंताओं को आशा में बदलना चाहती थी.”

लैंगिक समानता पर विचार
हालांकि ताकाइची का जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित होना एक मील का पत्थर है, लेकिन लैंगिक समानता पर उनका पिछला रिकॉर्ड एक अलग कहानी कहता है. उन्होंने 19वीं सदी के उस कानून को बदलने का विरोध किया है जिसके तहत विवाहित जोड़ों के लिए एक ही उपनाम रखना अनिवार्य है. वह शाही सिंहासन को केवल पुरुषों के हाथों में रखने की पक्षधर हैं और समलैंगिक विवाह का समर्थन नहीं करती हैं. कुल मिलाकर ये सभी बातें उन्हें पहले से ही परंपरावादी सत्तारूढ़ दल के रूढ़िवादी खेमे में मजबूती से खड़ा करती हैं. टोक्यो विश्वविद्यालय की एमेरिटस प्रोफेसर सदाफुमी कावाटो ने एएफपी को बताया, “उनका चुनाव राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की दिशा में एक कदम होगा. लेकिन उन्होंने पितृसत्तात्मक मानदंडों के खिलाफ लड़ने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है.”

जापान को पुनः महान बनाना लक्ष्य
ताकाइची की जीत एलडीपी में दक्षिणपंथ की जीत और उदारवादी इशिबा के राजनीति से प्रस्थान के बारे में बताती है. संकटग्रस्त पार्टी के लिए इसे एक बेहद जरूरी मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. ताकाइची के पास निश्चित रूप से एक दूरदर्शिता है, हालांकि यह दूरदर्शिता उन्हें और जापान को कहां ले जाएगी, यह देखना बाकी है. ताकाइची पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की शिष्या है, जिनकी 2022 में हत्या कर दी गई थी. उनका राजनीति में अतिराष्ट्रवाद और सामाजिक रूढ़िवादिता के साथ-साथ अर्थनीति को लेकर एक आक्रामक रुख भी शामिल है. उन्होंने कहा, “मैं हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने और संतुलन की भावना के साथ देश का नेतृत्व करने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं. आइए हम जापानी द्वीपसमूह को मजबूत और समृद्ध बनाएं और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं.”

युद्ध अपराधों के लिए अब और माफी नहीं
अन्य बातों के अलावा ताकाइची द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी अपराधों के बारे में आबे के संशोधनवादी दृष्टिकोण से सहमत हैं. वह यासुकुनी तीर्थस्थल पर अक्सर जाती हैं, जहां जापान के युद्ध में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिनमें फांसी दिए गए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं. कुछ एशियाई पड़ोसी देश खासकर चीन और कोरिया, जिन्होंने जापानी युद्ध अपराधों का खामियाजा भुगता है इसे जापान के अतीत के सैन्यवाद का प्रतीक मानते हैं. ताकाइची ने विशेष रूप से कहा है कि जापान को अपने युद्ध अपराधों के लिए अब और माफी मांगने की जरूरत नहीं है.

चीन को मानती हैं अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी 
ताकाइची जापान के सबसे बड़े अतिराष्ट्रवादी लॉबिंग समूह निप्पॉन कैगी की भी सदस्य हैं, जिसका उद्देश्य ‘युद्धोत्तर राष्ट्रीय चेतना को बदलना’ और जापान के वर्तमान संविधान विशेष रूप से अनुच्छेद 9 को संशोधित करना है. वह आबे की तरह जापान के सैन्य पुनर्निर्माण को गति देना चाहती है. ताकाइची चीन को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानती हैं और उससे मुकाबला करने के लिए देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना चाहती हैं. दरअसल, ताकाइची लंबे समय से चीन की कट्टर विरोधी रही हैं. उन्होंने ताइवान के साथ एक ‘अर्ध-सैन्य गठबंधन’ बनाने की भी कोशिश की है, जो हमेशा बीजिंग के सैन्य आक्रमण के खतरे में रहता है. संभावना है कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी बनाने की भी कोशिश करेंगी.

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