विदेश » भारत-अफगानिस्तान एक दूसरे के लिए कितने जरूरी, तालिबान मंत्री के दौरे के क्या मायने?

भारत-अफगानिस्तान एक दूसरे के लिए कितने जरूरी, तालिबान मंत्री के दौरे के क्या मायने?

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भारत उस समय इस इन हालातों पर नज़र बनाए हुए था. कुछ ही दिन में भारत अपने डिप्लोमेंट का वापिस बुला लेता है. तब से भारत और अफगानिस्तान के बीच कोई औपचारिक दौरा नहीं हुआ है. लेकिन अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत का दौरान करने जा रहे हैं, जो कि 9 अक्टूबर से 16 अक्टूबर के बीच तय है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित मुत्तकी को 30 सितंबर को सुरक्षा परिषद से विदेशी दौरे के लिए मंज़ूरी मिल गई थी.

इस दौरे के मायने

मुत्तकी की भारत यात्रा कई कारणों से महत्वपूर्ण है, सबसे पहले, अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद से यह काबुल से नई दिल्ली की पहली उच्च-स्तरीय यात्रा है. यहाँ यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत लंबे समय से तालिबान विरोधी रहा है. भारत 1980 के दशक में मुजाहिदीन के भी खिलाफ था.

लेकिन तालिबान को मान्यता न देने के बावजूद, भारत उनके साथ अपने संबंध बनाए हुए है. भारत लगातार अफगानिस्तान को सहायता पहुंचाता रहा है. ऐसा क्षेत्रीय भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक हितों को देखते हुए कहा जाता है.

कई अहम मुद्दों पर चर्चा

हालांकि मुत्तकी की यात्रा पर विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. इस दौरान कई विषयों पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें तालिबान के साथ संबंधों, आतंकवाद-निरोध, व्यापार आदि पर भारत की योजनाएं शामिल हैं.

द हिंदू के अनुसार, जिन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, उनमें से एक ईरान का चाबहार बंदरगाह. खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह के उपयोग की छूट समाप्त करने के बाद है.

इंडियन एक्सप्रेस ने अनुसार, मुत्तकी दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर पर बातचीत फिर से शुरू करने पर भी ज़ोर दे सकते हैं. मुत्तकी हेल्थ, बुनियादी ढाँचा और विकास पहलों के क्षेत्र में भारत से और सहयोग की भी माँग कर सकते हैं.

क़तर स्थित तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख सुहैल शाहीन भारत के साथ रिश्तों को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा, “मुत्तक़ी जैसे उच्च-स्तरीय दौरे व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए ज़रूरी हैं. तालिबान भारत की सहायता और अफ़ग़ान लोगों के साथ ऐतिहासिक मित्रता को महत्व देता है.”

दोनों देशों का एक-दूसरे के लिए क्या महत्त्व ?

भारत के लिए: अफगानिस्तान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. यह पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करता है और चाबहार बंदरगाह से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाता है. भारत आतंकवाद, जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को रोकने के लिए अफगानिस्तान से सहायता चाहता है. अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले की तालिबान ने निंदा की, जो सकारात्मक संकेत है.

अफगानिस्तान के लिए: भारत सबसे ज्यादा सहायता देने वाले देशों में एक है, जो पुनर्निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य में मदद करता है. अफगानिस्तान पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के साथ व्यापार चाहता है. सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तानी समूहों के अफगान इस्तेमाल पर चेतावनी दी.

2001 में अमेरिकी हमले के बाद भारत ने अफगानिस्तान की मदद में हर संभव कोशिश की है। भारत अफगानिस्तान का सबसे बड़ा क्षेत्रीय सहयोगी रहा है, जिसने 3 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दी।

2011 में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विकास पर केंद्रित था. भारत ने अफगान सेना को प्रशिक्षण और हेलीकॉप्टर दिए। सांस्कृतिक स्तर पर बॉलीवुड फिल्में, क्रिकेट और अफगान व्यंजन (जैसे सूखे मेवे) दोनों देशों को जोड़ते हैं.

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