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गाजा पट्टी में जारी इजराइल-हमास युद्ध ने न सिर्फ घरों को उजाड़ा है, बल्कि महिलाओं की जिंदगी को एक ऐसी अंधेरी गली में धकेल दिया है.
फोटो साभार : APयुद्ध की आग में जलते हुए उस मां का दिल कितना टूटता होगा, जब अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए उसे अपने शरीर को किसी के सामने परोसना पड़े? भूखे बच्चों का पेट भरने के लिए उसे उन मर्दों की भूख मिटानी पड़े, जो उसे 2 निवाले देने का वादा करता है…. गाजा पट्टी में जारी इजराइल-हमास युद्ध ने न सिर्फ घरों को उजाड़ा है, बल्कि महिलाओं की जिंदगी को एक ऐसी अंधेरी गली में धकेल दिया है, जहां भोजन के बदले शारीरिक संबंध बनाने की मजबूरी बन गई है. ऐसी एक-दो नहीं बल्कि कई महिलाओं ने अपनी आंसू भरी आंखों से ये दास्तां सुनाई कि कैसे भूख और बेबसी ने उन्हें इस दलदल में फंसा दिया.
दीपिका शर्मा पिछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें
दीपिका शर्मा पिछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र… और पढ़ें
October 01, 2025, 14:42 IST
फोटो साभार : AP
एक 38 साल की मां, जिसके छह बच्चे हैं, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “मैंने खुद से कहा कि कोई विश्वास नहीं करेगा.” हफ्तों तक बच्चों को भूखा देखने के बाद, वह एक सहायता एजेंसी से जुड़े आदमी से नौकरी का वादा सुनकर गई. लेकिन वह उसे एक खाली अपार्टमेंट में ले गया, और डर से उसने विरोध नहीं किया. बाद में उसे 100 शेकेल (करीब 30 डॉलर) और कुछ भोजन मिला, लेकिन नौकरी कभी नहीं. उसकी आंखों में आंसू भर आए जब उसने कहा, “मुझे डर था, मैं वहां से निकलना चाहती थी.” बच्चे भूख से रो रहे हों, और मां को अपनी इज्जत तक गंवानी पड़े – यह युद्ध की कितनी क्रूर सच्चाई है!
फोटो साभार : AP
एक और 35 साल की विधवा ने सहायता केंद्र पर अपना नंबर दिया, जहां एक UNRWA यूनिफॉर्म वाला आदमी था. रात को उसके फोन आने लगे – सेक्सुअल डिमांड्स के. उसने UNRWA में शिकायत की, लेकिन वहां से जवाब मिला कि उन्हें फोन रिकॉर्डिंग या ऐसा ही कोई सबूत चाहिए. लेकिन इस महिला के पास रिकॉर्डिंग करने वाला फोन ही नहीं था. वह कहती है, “मैं अपमानित महसूस कर रही थी.” जबकि UNRWA की कम्युनिकेशंस डायरेक्टर जूलियट टौमा कहती हैं कि उनकी एजेंसी में शोषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है, और शिकायत के लिए सबूत जरूरी नहीं. लेकिन व्यक्तिगत मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई.
वहीं एक 29 साल की मां ने बताया कि उसके चार बच्चे हैं, और एक सहायता वर्कर ने उसे पोषण सप्लीमेंट्स के बदले “शादी” (सेक्सुअल संबंध) का प्रस्ताव दिया. उसने मना किया, लेकिन कहती है, “मैं पूरी तरह अपमानित महसूस कर रही थी. मुझे अपने बच्चों के लिए मदद मांगनी पड़ी. अगर मैं नहीं करती, तो कौन करता?” ये महिलाएं सिर्फ भोजन चाहती हैं, लेकिन बदले में अपनी गरिमा खो रही हैं.





