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रूस का बायोन-एम नं. 2 उपग्रह 30 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद धरती पर लौटा. इसमें चूहे, मक्खियाँ, पौधों के बीज और सूक्ष्मजीव भेजे गए थे. मिशन का मकसद जीवन पर अंतरिक्ष के असर को समझना और यह परखना था कि क्या जीवन धरती पर अंतरिक्ष से आया हो सकता है.

लैंडिंग और शुरुआती जांच
उपग्रह का उतरना रूस के ओरेनबर्ग क्षेत्र की घास के मैदानों में हुआ. लैंडिंग के वक्त हल्की आग लग गई थी, जिसे तुरंत बुझा दिया गया. इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों वाली टीमें हेलीकॉप्टर से मौके पर पहुँचीं और तेजी से जीवित नमूनों को बाहर निकाला. मौके पर ही लगाए गए मेडिकल टेंट में प्रारंभिक जांच की गई. उदाहरण के लिए, मक्खियों की मोटर गतिविधि की जाँच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके नर्वस सिस्टम पर अंतरिक्ष यात्रा का क्या असर हुआ.
10 सेक्शन वाला वैज्ञानिक कार्यक्रम
इसकी वैज्ञानिक योजना 10 हिस्सों में बाँटी गई थी. पहले दो सेक्शन जानवरों पर गुरुत्वाकर्षण और रेडिएशन के असर की पढ़ाई के लिए थे. तीसरे से पाँचवे सेक्शन पौधों और सूक्ष्मजीवों पर अंतरिक्ष के असर को समझने के लिए थे. छठे से नौवें सेक्शन तक बायोटेक्नोलॉजी, रेडिएशन से सुरक्षा और नई तकनीक की टेस्टिंग शामिल थी.
दसवाँ सेक्शन छात्रों के प्रयोगों के लिए रखा गया था, जिसमें रूस और बेलारूस के विद्यार्थी जुड़े.
अंतरिक्ष से जीवन आने का प्रयोग
सबसे दिलचस्प प्रयोग था ‘मीटियोराइट’, जिसे वापसी के दौरान अंजाम दिया गया. इस एक्सपेरिमेंट में बेसाल्ट पत्थरों में सूक्ष्मजीव रखे गए थे ताकि यह देखा जा सके कि क्या वे वायुमंडल में प्रवेश के दौरान पैदा हुई भीषण गर्मी झेलकर जिंदा रह सकते हैं. यह प्रयोग उस सिद्धांत की जांच से जुड़ा है कि क्या जीवन धरती पर अंतरिक्ष से आया हो सकता है. इसे पैनस्पर्मिया थ्योरी कहते हैं.

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें
योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने… और पढ़ें
September 25, 2025, 15:01 IST





