विदेश » Russia Bion M2 Satellite Returns: Russia Space mission After 30 Days with Mice, Flies, Seeds and Space Life Experiments

Russia Bion M2 Satellite Returns: Russia Space mission After 30 Days with Mice, Flies, Seeds and Space Life Experiments

Facebook
Twitter
WhatsApp

Last Updated:

रूस का बायोन-एम नं. 2 उपग्रह 30 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद धरती पर लौटा. इसमें चूहे, मक्खियाँ, पौधों के बीज और सूक्ष्मजीव भेजे गए थे. मिशन का मकसद जीवन पर अंतरिक्ष के असर को समझना और यह परखना था कि क्या जीवन धरती पर अंतरिक्ष से आया हो सकता है.

1500 मक्खियां, 75 चूहे... रूस ने  में क्यों भेजे? एक मही
मॉस्को: रूस का जैविक अनुसंधान उपग्रह बायोन-एम नं. 2 (Bion-M No.2) 30 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी करने के बाद 19 सितंबर को सुरक्षित धरती पर लौट आया. इस मिशन को ‘नोआस आर्क’ कहा जा रहा है क्योंकि इसमें 75 चूहे, 1,500 से ज्यादा मक्खियां, पौधों के बीज, सूक्ष्मजीव और अन्य नमूने भेजे गए थे. यह उपग्रह 20 अगस्त को कजाकिस्तान के बैकानूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज-2.1बी रॉकेट के जरिए लॉन्च हुआ था. लगभग 370 से 380 किलोमीटर ऊँचाई की कक्षा में घूमते हुए इसने जीवों और पौधों को लगातार कॉस्मिक रेडिएशन और बिना ग्रेविटी के असर में रखा.

लैंडिंग और शुरुआती जांच

उपग्रह का उतरना रूस के ओरेनबर्ग क्षेत्र की घास के मैदानों में हुआ. लैंडिंग के वक्त हल्की आग लग गई थी, जिसे तुरंत बुझा दिया गया. इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों वाली टीमें हेलीकॉप्टर से मौके पर पहुँचीं और तेजी से जीवित नमूनों को बाहर निकाला. मौके पर ही लगाए गए मेडिकल टेंट में प्रारंभिक जांच की गई. उदाहरण के लिए, मक्खियों की मोटर गतिविधि की जाँच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके नर्वस सिस्टम पर अंतरिक्ष यात्रा का क्या असर हुआ.

10 सेक्शन वाला वैज्ञानिक कार्यक्रम

यह मिशन रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोस्मोस, रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज और इंस्टिट्यूट ऑफ बायोमेडिकल प्रॉब्लम्स (IBMP) का संयुक्त प्रयास था.

इसकी वैज्ञानिक योजना 10 हिस्सों में बाँटी गई थी. पहले दो सेक्शन जानवरों पर गुरुत्वाकर्षण और रेडिएशन के असर की पढ़ाई के लिए थे. तीसरे से पाँचवे सेक्शन पौधों और सूक्ष्मजीवों पर अंतरिक्ष के असर को समझने के लिए थे. छठे से नौवें सेक्शन तक बायोटेक्नोलॉजी, रेडिएशन से सुरक्षा और नई तकनीक की टेस्टिंग शामिल थी.
दसवाँ सेक्शन छात्रों के प्रयोगों के लिए रखा गया था, जिसमें रूस और बेलारूस के विद्यार्थी जुड़े.

अंतरिक्ष से जीवन आने का प्रयोग

सबसे दिलचस्प प्रयोग था ‘मीटियोराइट’, जिसे वापसी के दौरान अंजाम दिया गया. इस एक्सपेरिमेंट में बेसाल्ट पत्थरों में सूक्ष्मजीव रखे गए थे ताकि यह देखा जा सके कि क्या वे वायुमंडल में प्रवेश के दौरान पैदा हुई भीषण गर्मी झेलकर जिंदा रह सकते हैं. यह प्रयोग उस सिद्धांत की जांच से जुड़ा है कि क्या जीवन धरती पर अंतरिक्ष से आया हो सकता है. इसे पैनस्पर्मिया थ्योरी कहते हैं.

authorimg

Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने… और पढ़ें

homeworld

1500 मक्खियां, 75 चूहे… रूस ने में क्यों भेजे? एक मही

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी