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ट्रंप पर चल रहा कौन सा मुकदमा भारत के लिए बन सकता है राहत और कैसे?

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डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा एक मुकदमा भारत के लिए बड़ी राहत बन सकता है, क्या है पूरा मामला विस्तार से समझते हैं.

ट्रंप पर चल रहा कौन सा मुकदमा भारत के लिए बन सकता है राहत और कैसे?डोनाल्ड ट्रंप.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ चल रहा एक मुकदमा भारत के लिए बड़ी राहत बन सकता है, यह मुकदमा उन पर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है जो सीधे टैरिफ विवाद से संबंधित है. इस मुकदमे में ट्रंप की ओर से विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ पर सवाल उठाया गया है. अगर यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन हारता है तो भारत पर लगा 50 प्रतिशत टैरिफ हट सकता है और भारतीय निर्यातकों को अरबों डॉलर का मुनाफा हो सकता है.

ट्रंप प्रशासन की ओर से 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए गए हैं. दरअसल यह कानून राष्ट्रपति को विदेशी संकटनों से निपटने के लिए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की शक्ति देता है, लेकिन इसमें स्पष्ट तौर पर टैरिफ का कहीं जिक्र नहीं है, इसीलिए ट्रंप के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठाया गया है.

कैसे फंसे ट्रंप ?

ट्रंप ने अब तक व्यापार घाटे, चीन से फेंटेनिल तस्करी, और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर कनाडा, मैक्सिको, चीन और भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए हैं, इसके खिलाफ अमेरिका के छोटे बिजनेसमैन व अन्य स्टेट के व्यापार संगठनों ने उन पर मुकदमा दायर किया है. उनका तर्क है कि टैरिफ लगाने का अधिकार मूल रूप से अमेरिकी सीनेट को है, न कि राष्ट्रपति को. इस मामले को लेकर फेडरल कोर्ट में मुकदमा चला था, जिसमें ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया गया है. फेडरल सर्किट अपील कोर्ट ने हाल ही में 29 अगस्त 2025 को 7-4 के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने अमेरिकी सीनेट की टैरिफ लगाने की शक्ति हड़पी है.

अब नवंबर में होगी बहस

फेडरनल सर्किट अपील कोर्ट से यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, दरअसल ट्रंप प्रशासन ने 3 सितंबर को 251-पेज की अपील दायर की, जिसमें कहा कि टैरिफ हटने से 750 अरब से 1 ट्रिलियन डॉलर का रिफंड देना पड़ सकता है. इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट से यह अपील की है कि सरकार ने जो भी टैरिफ लगाए हैं, उन्हें वैध ठहराया जाए. 9 सितंबर को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया. कोर्ट ने इसकी सुनवाई तेजी से करने पर सहमति दे दी है. इस मामले में पहली सुनवाई नवंबर माह के पहले सप्ताह में होगी.

ट्रंप ने कैसे लगाए गए ये शुल्क?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2025 में ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ की घोषणा की, थी जो कई देशों पर 10 प्रतिशत बेसलाइन से शुरू होकर ब्राजील और भारत पर 50 प्रतिशत तक हैं. भारत पर 25 प्रतिशत रिसिप्रोकल टैरिफ व्यापार घाटे के लिए लगाया गया, और अतिरिक्त 25 प्रतिशत इसलिए लगाया है, क्योंकि भारत रूसी तेल खरीद रहा है. ट्रंप ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने IEEPA को व्यापक टैरिफों के लिए इस्तेमाल किया. इससे अमेरिका को अगस्त 2025 तक 159 अरब डॉलर की कमाई हुई, लेकिन वैश्विक व्यापार बाधित हो गया. अपील कोर्ट ने कहा कि ये टैरिफ ‘अनहर्ड ऑफ’ और ‘ट्रांसफॉर्मेटिव‘ हैं, इसलिए इसके लिए सीनेट की अनुमति जरूरी है.

ट्रंप के टैरिफ से भारत को कितना नुकसान?

भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका है, यहां भारत हर साल तकरीबन 80 डॉलर से ज्यादा का सामान बेचता है. हालांकि टैरिफ की वजह से टेक्सटाइल और ज्वेलरी का निर्यात 35 अरब डॉलर तक गिर सकता है, इसके अलावा दवाइयां और ऑटोपार्ट और रसायन महंगे होने के चांसेज भी हैं. भारतीय एक्सपर्ट इसे ट्रेड वॉर का हिस्सा बता रहे हैं

ट्रंप का हारना भारत के लिए अच्छा क्यों?

ट्रंप के टैरिफ लगाए जाने पर छोटे व्यवसायियों का तर्क है कि IEEPA टैरिफ के लिए नहीं बना है, इसीलिए इन्हें वैध नहीं माना जाना चाहिए, जबकि ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह समय व्यापार असंतुलन और रूसी तेल खरीद के लिए राष्ट्रीय आपातकाल है. अब सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला देगा, हालांकि अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ आता है तो उनके द्वारा लगाए गए सभी टैरिफ अवैध हो जाएंगे, अगर ऐसा हुआ तो ये भारत के लिए फायदे का सौदा होगा.

भारत को कैसे होगा फायदा?

अगर भारत से टैरिफ हट जाता है तो सामान सस्ता होगी, यानी की मांग बढ़ेगी, ऐसे में निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है, टेक्सटाइल, ज्वेलरी और इंजीनियरिंग उद्योगों को फायदा, नौकरियों पर खतरा कम हो जाएगा. अमेरिका के साथ घाटा कम, नई डील की गुंजाइश भी बढ़ जाएगी. अगर फैसला 2026 तक लंबा खिंचा, तो भारत को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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