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अरुणाचल में सीमा सुरक्षा को लेकर 1465 किमी लंबा फ्रंटियर हाईवे

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FRONTIER HIGHWAY: 1962 की सबसे भीषण जंग जिस इलाक़े में हुई. अब वहा भारतीय सेना की मजबूती और तैनाती तेजी होगी. भारत सरकार की तरफ से पूरे अरुणाचल में सड़को जाल बिछाया जा रहा है. यहां भौगोलिक परिस्थिति जैसे की घने जंगल, बारिश और बर्फबारी इसे विषम बना देती है.भारत सरकार की तरफ से बनाया जा रहा फ़्रंटियर हाईवे एक गेमचेंजर हाईवे होगा.

चीनी घोस्ट विलेज के पास से निकलेगी NH-913, अगले हफ्ते हो सकता है शिलान्यासगेमचेंजर फ्रंटियर हाईवे
FRONTIER HIGHWAY: चीन के साथ लगती पूर्वोत्तर की सीमा शुरू से ही भारत की एक कमजोर कड़ी के तौर पर देखी जाती थी. लेकिन अब एक ऐसा प्रोजेक्ट लाया जा रहा है जो अरुणाचल की कमजोर कड़ी को मजबूत करेगा. यह प्रोजेक्ट है भारतीय फ़्रंटियर हाईवे प्रोजेक्ट यानी NH-913. सूत्रों के मुताबिक़ फ़्रंटियर हाईवे की आधारशिला पीएम मोदी द्वारा अगले हफ्ते रखी जा सकती है. यह एक मास्टरस्ट्रोक से कम नहीं होगा. 1500 किलोमीटर के करीब यह रोड भूटान ट्राई जंक्शन से शुरू होकर म्यांमार से लैंड लॉक भारतीय विलेज विजय नगर तक जाएगी.

गेम चेंजर फ़्रंटियर हाईवे
चीन अपने को इस इलाके में मजबूत करने के लिए एलएसी के पास घोस्ट विलेज बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक़ 600 के करीब ऐसे गाँव चीन ने बसाए हैं. अब उन गाँव के पास से होकर भारतीय गाड़ियाँ गुजरेंगी. अंग्रेजों के बनाए मैकमैहोन लाइन जिसके जरिए भारत और तिब्बत के बीच की सीमा बनाई गई थी, उसके साथ-साथ भारतीय फ़्रंटियर हाईवे गुजरेगा.

  • यह हाईवे लगभग 1465 किलोमीटर लंबा है.
  • तवांग के पास भारत-भूटान-तिब्बत ट्राई जंक्शन के मॉगो से शुरू होगा और तीन ओर म्यांमार से घिरे विजय नगर तक जाएगी.
  • पूरा प्रोजेक्ट तकरीबन 27 हजार करोड़ रुपये का है.
  • अरुणाचल फ़्रंटियर हाईवे ईस्ट कामेंग, वेस्ट कामेंग, अपर सुभांसरी, अपर सियांग, दिबांग वैली, लोहित, अंजवॉ और चांगलाग से होकर गुजरेगा.
  • अरुणाचल प्रदेश में फिलहाल दो हाईवे हैं.
  • एक है ट्रांस अरुणाचल हाईवे और दूसरा है ईस्ट-वेस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर हाईवे.
बीआरओ के हिस्से 531 किलोमीटर की रोड
विषम परिस्थितियों में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) बॉर्डर एरिया में रोड नेटवर्क को तैयार करने में जुटी है. BRO इस क्षेत्र में लगातार नए-नए कीर्तिमान बनाकर चीन और पाकिस्तान को बैकफुट में डालने का काम कर रही है. इस फ्रंटियर हाईवे पर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) को 531 किलोमीटर की सड़कें बनाने का जिम्मा मिला है. हांलाकि साल 2022 से इस रोड का काम शुरू है. खास बात यह है कि साल 2024 से BRO ने इसका काम शुरू कर दिया है. कायिंग से टेटो के बीच रोड की फॉर्मेशन कटिंग का काम जारी है.

तीनों हाईवे को भी जोड़ा जाना है
अरुणाचल में फ्रंटियर हाईवे के आने के बाद कुल मिलाकर 3 हाईवे हो जाएंगे. और इन तीनों को जोड़ने के लिए भारत सरकार की तरफ से एक बड़ी योजना बनाई गई है. कुल 6 वर्टिकल और डायगनल इंटर कॉरिडोर हाईवे को बनाया जाना है.

  • 6 हाईवे की लंबाई 1048 किलोमीटर है और इन पर 15720 करोड़ रुपये का खर्च होने वाला है.
  • 6 हाईवे से बॉर्डर इलाकों तक आसानी से पहुंच सकेंगे.
  • अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में जो कनेक्टिविटी बढ़ेगी.
  • पूरे प्रोजेक्ट की लागत 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है.
  • कुल 2500 किलोमीटर की डबल लेन रोड तैयार होगी.

बीआरओ के हिस्से 531 किलोमीटर की रोड
बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) इस पूरे हाईवे पर 531 किलोमीटर की सड़कें बनाने का जिम्मा मिला है. खास बात यह है कि साल 2024 से BRO ने इसका काम शुरू कर दिया है. कायिंग से टेटो के बीच रोड की फॉर्मेशन कटिंग का काम जारी है. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का इलाका बताकर 1962 में इस पर कब्जे के मकसद से चीन की सेना अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों तक पहुंच गई थी. 60 साल पहले सड़कों की हालत बद से बदतर थी जिसके चलते सेना की मूवमेंट पर खासा असर पड़ा था. चीन को चुनौती देने के लिए भारतीय सेना बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ और राज्य सरकार के साथ मिलकर अरुणाचल प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाने में जुटी है.

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