शाह ने महाविद्यालय की लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन नवीन इमारतों के निर्माण का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दिव्यांग बच्चों के जीवन में उम्मीद की किरण फैलेगी. उन्होंने श्रीमती सुशीला बोहरा द्वारा 5 विद्यालय, 2 महाविद्यालय और निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, भोजन और विशेष साधनों के माध्यम से दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षित करने के कार्य की सराहना की.
गृह मंत्री शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में “विकलांग” शब्द की जगह “दिव्यांग” शब्द को अपनाया, जिससे समाज में दिव्यांगजनों के प्रति नजरिया बदला. उन्होंने कहा कि दिव्यांग लोग डॉक्टर, अधिकारी, खेल खिलाड़ी और उद्यमी बन सकते हैं, बस उन्हें उचित मंच और सहयोग की आवश्यकता होती है. उन्होंने पैरालंपिक खेलों में भारत की सफलता का भी जिक्र किया.
4,626 दिव्यांग बच्चों को शिक्षा और सम्मानजनक स्थान दिलाया
इस दौरान संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी नए भवनों के महत्व पर जोर दिया. कार्यक्रम में न्यायाधीश संदीप मेहता, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत, उद्योग मंत्री के.के. विश्नोई, सुशीला बोहरा और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे. इस अवसर पर सुशीला बोहरा की जीवनी “मैं न थकी न हारी” का ब्रेल संस्करण भी जारी किया गया.





